शह मात The Big Debate: सुरक्षा चक्र हटे नहीं.. खतरा अभी बाकी है! डिप्टी CM ने दिया बयान तो गागड़ा ने किया सावधान, क्या बस्तर में अब भी जिंदा है नक्सलवादी विचारधारा?

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सुरक्षा चक्र हटे नहीं.. खतरा अभी बाकी है! डिप्टी CM ने दिया बयान तो गागड़ा ने किया सावधान, Naxalite ideology in Bastar

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  • Publish Date - August 31, 2026 / 11:55 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 12:04 AM IST

रायपुरः Naxalite Ideology in Bastar छत्तीसगढ़ में नेताओं को मिली सुरक्षा और उसकी समीक्षा पर सियासत तेज है। दरअसल, बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद अब नेताओं को हासिल सिक्योरिटी की समीक्षा की तैयारी है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के संकेत के बाद विपक्ष इसे आत्मघाती कदम बता रहा है तो सरकार का दावा है कि सब कुछ नियम-कायदे से समीक्षा करके समिति की सलाह पर ही होगा।

Naxalite Ideology in Bastar बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे के बाद 4 से 5 महीने बीत गए हैं। नक्सलियों के खौफ के चलते, बस्तर के सैंकड़ों नेताओं को सुरक्षा मिली हुई है। बस्तर में पंचायत से लेकर संसद के वर्तमान और पू्र्व सदस्यों तक को अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा में प्रदेश पुलिस के सैंकड़ों जवान इंगेज हैं। अब जबकि नक्सलवाद खत्म हो चुका है तो लाजिमी है कि नेताओं की दी गई सिक्योरिटी की समीक्षा की जाए। प्रदेश के गृहमंत्री ने इसे लेकर जैसे ही समीक्षा की बात कही तो विपक्ष के नेता ने फौरन नसीहत दी कि मामले में, सरकार को ओवर कॉन्फिडेंट नहीं होना चाहिए। वैसे ऐसा सोचने वाले विपक्ष के नेता के साथ-साथ सत्तापक्ष के नेता भी हैं। पूर्व मंत्री, सीनियर बीजेपी नेता महेश गागड़ा भी मामने हैं कि अभी सुरक्षा हटाना जल्दबाजी होगी, हालांकि इसके लिए उनका तर्क अलग है।

समीक्षा की बात पर आ रही प्रतिक्रियाओं पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि नेताओं को मिली सुरक्षा की पहले भी वक्त-वक्त पर समीक्षा होती रही है, एक बार फिर ऐसा ही होगा। वैसे नेताओं की सुरक्षा का मुद्दा नया नहीं है। सैंकड़ों नेताओं की सिक्योरिटी में लगे हजारों जवानों लगे हैं यानि की गृहविभाग का बड़ा बजट और पुलिस जवानों की बड़ी संख्या इस कार्य में लगी है। जाहिर है इन्हें फौरन और एक साथ हटाना किसी भी तौर पर सही नहीं हो सकता, लेकिन ये भी सच है कि सरकार और सत्तापक्ष के कई नेता स्वयं इस बारे में अनुभवी और सचेत हैं। जो भी सिफारिश होगी वो हर तरह की परिस्थिती के देख-भांप और परख कर ही होगी। सवाल ये कि विपक्ष की फिक्र कितनी जायज है?