Vande Bharat
नई दिल्ली : Vande Bharat दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक छात्र आंदोलन का चेहरा बने तो झारखंड के रांची में देवेंद्र नाथ महतो भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र नेता बनकर उभरे हैं। उन्हें ‘झारखंड का सोनम वांगचुक तक कहा जाने लगा है। महतो ने 25 जुलाई से परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था और 2 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
महतो रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव से हैं। लंबे समय से छात्र और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। अभी JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहर बनकर उभरे हैं। उनकी मांग सिर्फ परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की है। झारखंड में जारी छात्र आंदोलन से जुड़ी एक रिपोर्ट आपको दिखाते हैं।
इन तस्वीरों के देखकर चैकिए नहीं। ये दिल्ली का कोई जंतर मंतर नहीं है बल्कि झारखंड के रांची में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर जैसा आंदोलन चल रहा है। छात्र JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बीते कई दिनों से आंदोलन कर रहे है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 7 से ज्यादा प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं। इनमें छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल है। देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अन्न-जल तक छोड़ रखा था लेकिन बुधवार को सोनम वांगचुक ने देवेंद्र से वीडियो कॉल पर बात की उनकी अपील पर देवेंद्र ने पानी पिया लेकिन अपना अनशन जारी रखा है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे। इसी बीच CJP चीफ अभिजीत दिपके ने भी झारखंड के छात्र आंदोलन को समर्थन दिया और छात्रों से मिलने के लिए रांची आने की बात कही। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान बैकफुट पर रही बीजेपी झारखंड के आंदोलन के खुलकर समर्थन में आ गई है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई बीजेपी विधायक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे अनशन पर बैठे छात्रों से मुलाकात कर परीक्षा रद्द करने और उसकी CBI जांच की मांग की।
वहीं दूसरी तरफ झारखंड सरकार ने छात्रों के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया लेकिन छात्रों ने प्रदर्शन स्थल पर छात्रों से बातचीत की शर्त रख दी है। रांची में छात्रों का ये आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा के रिजल्ट तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि छात्र पूरे भर्ती सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में हैं। 6 अगस्त से विधानसभा का सत्र भी शुरू हो रहा है ऐसे में देखना होगा सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और विधानसभा में विपक्ष के तीखे सवालों का कैसे सामना करती है।