बिश्केक, एक सितंबर (भाषा) भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के कई अहम निर्णय को मंगलवार को रेखांकित किया, जिनमें सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने तथा आतंकवाद और चरमपंथ जैसे अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के उपाय शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने 13 निर्णय की जानकारी दी, जिनमें से एक है, ‘‘एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों से निपटने के वास्ते एक सार्वभौमिक केंद्र के नियमों को मंजूरी देना।’’
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि इस केंद्र से आतंकवाद, चरमपंथ, संगठित अपराध और अन्य अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने में एससीओ सदस्यों के बीच सहयोग मजबूत होने और बेहतर तालमेल व जानकारी साझा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा से जुड़ा यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अन्य नेताओं की मौजूदगी में इस समूह से कहा कि वह आतंकवाद को ‘‘सरकार की नीति’’ के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों का मुकाबला करे।
प्रधानमंत्री ने एससीओ से अपील की कि वह आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और पनाहगाह के ‘‘पूरे तंत्र को खत्म करने’’ के लिए एकजुट होकर काम कर तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘‘दोहरे मापदंड’’ को खारिज करे।
विदेश मंत्रालय ने जिन निर्णय पर जोर दिया है, उनमें ‘बिश्केक घोषणा’ भी शामिल है। उम्मीद है कि इससे भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी पर अपना पक्ष रखने के लिए एक मंच मिलेगा और मध्य एशिया तथा व्यापक यूरेशिया क्षेत्र के साथ उसके संबंध और मजबूत होंगे।
एक और निर्णय एससीओ चार्टर में बदलाव और नयी चीजें जोड़ने से जुड़ा प्रोटोकॉल है। इससे भारत को समूह के बदलते संस्थागत ढांचे को आकार देने में भागीदारी करने का मौका मिलता है और एससीओ ढांचे में अंग्रेजी को शामिल करने में समर्थन मिलता है।
एससीओ एक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा समूह है, जिसे 2001 में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर बनाया था। बाद में इसमें भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस को पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल किया गया, और कई अन्य देशों को पर्यवेक्षक या वार्ता-साझेदार का दर्जा दिया गया।
इस समूह ने इस साल अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाई, जिसके तहत किर्गिस्तान की अध्यक्षता में बिश्केक में शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
भाषा
सुभाष पवनेश
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