चीन के राष्ट्रपति शी ने एससीओ सदस्य देशों से सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया

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चीन के राष्ट्रपति शी ने एससीओ सदस्य देशों से सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 07:16 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 07:16 PM IST

बिश्केक, एक सितंबर (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता बनाने और आतंकवाद, अलगाववाद, चरमपंथ, सीमा-पार से होने वाले संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और दूरसंचार के जरिये होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया।

किर्गिस्तान की राजधानी में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए शी ने कहा, ‘‘हमें सुरक्षा को एक मुख्य लक्ष्य मानते हुए उस पर काम करते रहना चाहिए और साझा सुरक्षा का माहौल बनाना चाहिए। हमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए मिलकर कदम उठाने चाहिए।’’

शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेता शामिल हुए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ, सीमा-पार संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और दूरसंचार के जरिये होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’’

शी ने परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के लिए बहुपक्षीय साझेदारी की जरूरत के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘‘हम परमाणु सुरक्षा के लिए एक समझदारी भरे, समन्वित और संतुलित नजरिए में विश्वास करते हैं और परमाणु सुरक्षा के लिए मजबूत बहुपक्षीय साझेदारी का समर्थन करते हैं।’’ हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा।

शी ने कहा कि एससीओ सदस्य देशों को सूचना सुरक्षा, जैव-सुरक्षा और बाहरी अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करना चाहिए।

अमेरिका की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमें बाहरी ताकतों को हमारे आंतरिक मामलों में दखल देने, हमारी राजनीतिक सुरक्षा को खतरे में डालने और क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने से रोकना होगा।’’

उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने एक असाधारण सफर तय किया है और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के एक अहम स्तंभ के रूप में उभरा है।

शी ने कहा, ‘‘इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह लगातार एक नए तरह के क्षेत्रीय सहयोग संगठन के रूप में विकसित हुआ है, जिसका क्षेत्रफल और आबादी सर्वाधिक है और जिसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं।’’

एससीओ के सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं।

चीन ने रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ मिलकर इस संगठन की स्थापना की थी। बीजिंग में एससीओ का मुख्यालय है।

शी के 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की भी पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि चीन एससीओ डिजिटल अर्थव्यवस्था मंच, एससीओ कृषि एक्सपो और अन्य कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करना जारी रखेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एससीओ के साथी देशों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय एआई ऐप सहयोग केंद्र बनाएंगे, फोटोवोल्टिक और पवन ऊर्जा की क्षमता को एक-एक करोड़ किलोवाट तक बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करना जारी रखेंगे, अगले तीन वर्षों में अन्य एससीओ देशों के साथ 100 प्रौद्योगिकीय सहयोग परियोजना लागू करेंगे और चीन-एससीओ सहयोग के जरिए हरित उद्योग के लिए और अधिक दक्ष लोगों को तैयार करेंगे।’’

बाद में ‘अधिक न्यायपूर्ण और उचित वैश्विक शासन के लिए समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व की संयुक्त रूप से वकालत’ विषय पर ‘एससीओ प्लस’ की बैठक को संबोधित करते हुए, शी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को फिर से मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ एक या कुछ देशों का दबदबा या गुटों की राजनीति असल बहुपक्षवाद नहीं है। उन्होंने बड़े देशों से नियमों, और कानून के शासन को बनाए रखने में नेतृत्व करने और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने का आह्वान किया।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश