वाशिंगटन, 16 जुलाई (एपी) प्यू रिसर्च सेंटर के एक नए सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि वर्षों तक दुनिया में चीन की तुलना में अमेरिका के प्रति अधिक सकारात्मक धारणा रही लेकिन इस वर्ष यह रुझान उलट गया है और ज्यादातर देशों में चीन को अमेरिका से बेहतर माना जा रहा है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बदलाव की एक प्रमुख वजह ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के सहयोगी देशों के बीच बढ़ा तनाव है।
फरवरी से मई के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में शामिल 36 देशों और क्षेत्रों में से 25 में लोगों ने अमेरिका की तुलना में चीन के प्रति अधिक सकारात्मक राय व्यक्त की। इनमें कनाडा और मेक्सिको भी शामिल हैं। यह सर्वेक्षण ऐसे समय किया गया जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था।
बुधवार को जारी सर्वेक्षण के अनुसार, केवल छह देशों में ही अमेरिका के प्रति सकारात्मक धारणा चीन से अधिक रही।
सर्वेक्षण में शामिल 36 देशों और क्षेत्रों में से 22 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में अधिक सकारात्मक राय सामने आई। इनमें कनाडा, मेक्सिको तथा फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख यूरोपीय देश शामिल हैं। हालांकि, कुछ देशों में दोनों नेताओं के प्रति लोगों का भरोसा कम पाया गया।
प्यू रिसर्च सेंटर की ‘ग्लोबल एटीट्यूड्स रिसर्च’ की एसोसिएट डायरेक्टर और अध्ययन से जुड़ी शोधकर्ता लॉरा सिल्वर ने कहा कि करीब दो दशकों से वैश्विक जनमत पर नजर रखने के दौरान यह पहला अवसर है जब चीन को अमेरिका से अधिक सकारात्मक रूप में देखा गया है।
उन्होंने कहा कि अतीत में दोनों देशों के प्रति राय कई बार लगभग समान रही, लेकिन अब तक चीन के पक्ष में इतना स्पष्ट झुकाव कभी नहीं देखा गया था।
सिल्वर के अनुसार, कोविड-19 महामारी का प्रभाव कम होने और अमेरिका के प्रति वैश्विक धारणा कमजोर पड़ने से यह बदलाव देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि युद्धों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बाद कई देशों में यह धारणा बनी है कि अमेरिका वैश्विक शांति और स्थिरता में अपेक्षित योगदान नहीं दे रहा है तथा राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति लोगों का विश्वास भी कम हुआ है।
सिल्वर ने कहा कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण संबंधी ट्रंप के दावे, वेनेजुएला के तत्कालीन नेता निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और गाजा में इजराइल-हमास युद्ध को लेकर अमेरिका की भूमिका के कारण भी कई देशों में उसके प्रति समर्थन घटा है।
उन्होंने कहा कि हाल के महीनों और वर्षों में वैश्विक स्तर पर अमेरिका की कई नीतियों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक रूप में नहीं देखा है।
सिल्वर ने कहा कि महामारी की याद धूमिल पड़ने के अलावा चीन को अमेरिका के साथ तुलना का भी लाभ मिला है। उनके अनुसार, कई देशों में चीन को अपेक्षाकृत अधिक भरोसेमंद साझेदार और वैश्विक शांति एवं स्थिरता में योगदान देने वाला देश माना जा रहा है।
सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका के कुछ सहयोगी देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान धारणा में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उदाहरण के लिए, कनाडा में अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का प्रतिशत 2023 के 57 प्रतिशत से घटकर 33 प्रतिशत रह गया, जबकि इसी अवधि में चीन के प्रति सकारात्मक राय 14 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई।
पिछले वर्ष ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर कई शुल्क लगाए थे और यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका का ‘‘51वां राज्य’’ बन सकता है।
फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, स्वीडन और नीदरलैंड सहित कई प्रमुख यूरोपीय देशों में भी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रति लोगों की राय में बदलाव दर्ज किया गया।
ब्रिटेन में, जहां 2023 में लगभग 60 प्रतिशत लोगों की अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय थी, अब लोगों की राय अमेरिका और चीन के प्रति लगभग समान है। तीन वर्ष पहले तक इस मामले में अमेरिका को 32 प्रतिशत अंकों की बढ़त हासिल थी।
जिन छह देशों में अमेरिका के प्रति चीन से अधिक सकारात्मक राय दर्ज की गई, उनमें इजराइल शीर्ष पर है। वहां लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की, जबकि चीन के लिए यह आंकड़ा 19 प्रतिशत रहा। अन्य पांच देश जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, फिलीपीन और पोलैंड हैं। हालांकि, इन देशों में भी हाल के वर्षों में अमेरिका के प्रति सकारात्मक धारणा में कमी आई है।
प्यू की रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सम्मान के मामले में अमेरिका अब भी चीन से आगे है, हालांकि दोनों के बीच का अंतर घट रहा है।
एपी
मनीषा प्रशांत
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