(अदिति खन्ना)
लंदन, 28 सितंबर (भाषा) ब्रिटेन की आतंकवाद रोधी पुलिस (सीटीपी) ने सोमवार को कहा कि रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) अड्डे पर विस्फोटक से हमले की साजिश के मामले में आतंकवाद से जुड़े आरोपों को लेकर गिरफ्तार किये गए सभी पांच व्यक्ति 20 से 30 साल की उम्र के ब्रिटिश नागरिक हैं।
दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में आरएएफ फेयरफोर्ड की ओर जा रही तीन संदिग्ध गाड़ियों को रविवार को अधिकारियों ने रोका, जिसके बाद सीटीपी इस मामले की जांच कर रही है।
मामले में, ग्लूसेस्टरशायर के वेल्फोर्ड इलाके में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन पर ब्रिटिश विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध करने और आतंकवाद रोधी अधिनियम की धारा 5 के तहत, आतंकी घटना को अंजाम देने की तैयारी करने का संदेह है।
सीटीपी ने एक बयान में कहा, ‘‘लंदन में रहने वाले इन लोगों को पुलिस एवं अपराध साक्ष्य अधिनियम के तहत हिरासत में रखा गया है और उनकी हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई है।’’
सीटीपी की वरिष्ठ राष्ट्रीय समन्वयक, उप सहायक आयुक्त विक्की इवांस ने कहा, ‘‘यह बहुत ही जटिल और बड़े पैमाने का अभियान है। इसमें स्थानीय और राष्ट्रीय पुलिस, रक्षा मंत्रालय और स्थानीय एजेंसियां शामिल हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस घटना के पीछे के कारणों के संबंध में लगाई जा रही अटकलों और उठ रहे भू-राजनीतिक सवालों से अच्छी तरह वाकिफ हूं। हालांकि, मेरा आग्रह है कि इस समय सीटीपी को सावधानी और स्पष्टता से काम करने दिया जाए।’’
वेल्फोर्ड की एक स्थानीय महिला किसान ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि पेड़ों के पास ‘‘हुड और मास्क पहने हुए लोगों का एक बड़ा समूह’’ देखकर उन्होंने अधिकारियों को इसकी सूचना दी।
उन्होंने बीबीसी को बताया, ‘‘मेरा मानना है कि मेरे 999 पर किये गए फोन ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।’’
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने उनका शुक्रिया अदा किया लेकिन इस बात पर जोर दिया कि किसान को मामले की गंभीरता का शायद पूरा अंदाजा नहीं था।
पश्चिम एशिया में जारी जंग के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका के हमले शुरू करने के लिए आरएएफ फेयरफोर्ड का इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि रविवार को आरएएफ फेयरफोर्ड के पास गिरफ्तार किये गए लोग ‘‘बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘वे हमारे (वायुसेना) ठिकाने को बड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। मामले की जांच में ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना बहुत फायदेमंद रहा।’’
यह घटना जुलाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा आरएएफ फेयरफोर्ड पर हमला करने की धमकी देने और ‘‘ब्रिटिश शासन’’ के खिलाफ परोक्ष धमकियों के बाद हुई है।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश