(मारिना मीरों एवं रॉड थॉर्नटन – किंग्स कॉलेज लंदन )
लंदन, 28 सितंबर (द कन्वरसेशन) रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध लगातार बदलता रहा है। इसका ताजा उदाहरण रूस द्वारा लंबी दूरी तक मार करने वाले नए जेट इंजन चालित ड्रोन की तैनाती है, जिसने हवाई हमलों से अपने शहरों की रक्षा करने की यूक्रेन की क्षमता को प्रभावित किया है।
यूक्रेन की वायुसेना के प्रवक्ता कर्नल यूरी इनहात ने 14 सितंबर को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा कि यूक्रेन नए ‘गेरेन-5’ ड्रोन से होने वाले केवल करीब 60 प्रतिशत हमलों को रोक पा रहा है। इसके मुकाबले अन्य ड्रोन से होने वाले हमलों को रोकने में यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली की सफलता दर करीब 95 प्रतिशत है।
रूसी सूत्रों के अनुसार, गेरेन-5 की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर तक है और यह करीब 6,000 मीटर की अधिकतम ऊंचाई पर उड़ सकता है, जो पहले के ड्रोन की तुलना में अधिक है।
गेरेन-5 ड्रोन पिछले मॉडलों की तुलना में तेज भी हैं और उनकी अनुमानित अधिकतम गति करीब 600 किलोमीटर प्रति घंटा है। पहले के संस्करणों के विपरीत इन ड्रोन में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव की क्षमता भी है। इन विशेषताओं के कारण यूक्रेन के लिए जमीन से संचालित वायु रक्षा प्रणालियों के जरिए इन्हें रोकना विशेष रूप से मुश्किल हो गया है।
इनहात ने कहा कि अगस्त में रूस द्वारा गेरेन-5 का इस्तेमाल शुरू किए जाने के बाद यूक्रेन को अपने लड़ाकू विमानों का ‘‘बहुत गहन इस्तेमाल’’ करना पड़ा है और पायलट सीधे इन ड्रोन को मार गिरा रहे हैं।
हालांकि, गेरेन-5 की प्रभावशीलता केवल उसकी गति और मारक क्षमता तक सीमित नहीं है। रूसी सैन्य विशेषज्ञ यूरी नुतोव के अनुसार, इन ड्रोन में डिजिटल भू-मानचित्र से जुड़ी विजन प्रणाली लगी है, जिससे वे लक्ष्यों की पहचान कर उनका चयन स्वायत्त रूप से कर सकते हैं।
—– यूक्रेन का हवाई युद्ध —–
2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के तत्काल बाद यूक्रेन के खिलाफ हवाई युद्ध अपेक्षित तरीके से आगे बढ़ा और दोनों पक्ष लड़ाकू विमानों पर काफी निर्भर रहे। इन विमानों की दो प्रमुख भूमिकाएं थीं—दुश्मन के विमानों से सीधे मुकाबला करना और जमीनी बलों के समर्थन में लक्ष्यों पर हमला करना।
हालांकि, स्थिति जल्द ही बदल गई। वायु रक्षा प्रणालियों से दोनों पक्षों के विमानों को भारी नुकसान होने के कारण यूक्रेन का हवाई युद्ध धीरे-धीरे लंबी दूरी से हमले की ओर बढ़ गया।
रूस ने 2023 से ग्लाइड बमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया। स्थिरता प्रदान करने वाले पंखों और नेविगेशन प्रणालियों से लैस इन बमों को लक्ष्य से करीब 70 किलोमीटर दूर से छोड़ा जा सकता था, जिससे वे अधिकांश विमान भेदी प्रणालियों की पहुंच से बाहर रहते थे। इससे युद्धक्षेत्र में हथियार पहुंचाने का जोखिम कम हो गया।
इसके बाद ड्रोन जल्द ही हवाई शक्ति के प्रमुख साधनों में शामिल हो गए। इनमें चालक दल नहीं होता और अपेक्षाकृत सरल संरचना के कारण इन्हें कम लागत में बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है। दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चों के पास छोटे ड्रोन का इस्तेमाल किया है, जबकि बड़े और लंबी दूरी के ड्रोन ने यूक्रेन और रूस के भीतर काफी दूर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाया है।
पहले के लंबी दूरी के ड्रोन को मार गिराना अपेक्षाकृत आसान था। प्रोपेलर से चलने के कारण उनकी गति कम थी। पहला जेट इंजन चालित ड्रोन गेरेन-3 वर्ष 2025 में तैनात किया गया था। यह गेरेन-2 की 185 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के मुकाबले 330 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकता था। हालांकि इसकी मारक क्षमता गेरेन-2 की संभावित 2,500 किलोमीटर की दूरी के मुकाबले काफी कम, केवल 600 किलोमीटर थी, लेकिन यह अधिक ऊंचाई पर उड़ सकता था, जिससे वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे निशाना बनाना मुश्किल हो गया।
उसी वर्ष बाद में गेरेन-4 यूक्रेन के आसमान में दिखाई दिया, जिसकी अधिकतम गति 500 किलोमीटर प्रति घंटा और मारक क्षमता 850 किलोमीटर थी। अगस्त 2026 में रूस ने गेरेन-5 का पहली बार अभियान स्तर पर इस्तेमाल किया, जिसकी गति और मारक क्षमता दोनों पहले के मॉडलों से अधिक हैं।
यूक्रेन की सैन्य खुफिया सेवा ने गेरेन-5 में पाए गए घटकों का विवरण जारी किया है, जिससे पता चलता है कि इसकी आपूर्ति श्रृंखला में विदेशी तकनीक का व्यापक इस्तेमाल हुआ है। इनमें चीन से आपूर्ति किया गया जेट इंजन, अमेरिका में निर्मित डिजिटल प्रोसेसर और जर्मनी में निर्मित ट्रांजिस्टर शामिल हैं।
घटकों की सूची से संकेत मिलता है कि रूस ने ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित कर ली हैं, जो उसे पश्चिमी प्रतिबंधों से बचते हुए कई देशों से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध तकनीक हासिल करने और फिर अंतिम प्रणाली का घरेलू स्तर पर उत्पादन करने में सक्षम बनाती हैं।
रूस इन नए जेट इंजन चालित ड्रोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में भी सक्षम है। यूक्रेनी सैन्य खुफिया के अनुसार, रूस शरद और सर्दियों में यूक्रेन के खिलाफ अभियान के लिए अपने भंडार बढ़ाने के वास्ते गेरेन-4 और गेरेन-5 के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है।
यह यूक्रेन के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है, क्योंकि उसके पास पश्चिमी देशों से मिली सतह से हवा में मार करने वाली और हवा से हवा में मार करने वाली पैट्रियट मिसाइलों का भंडार कम हो रहा है। इन मिसाइलों को गेरेन-5 ड्रोन को मार गिराने के लिए सबसे प्रभावी साधन बताया गया है।
यूक्रेन के सैन्य खुफिया विभाग के उप प्रमुख मेजर जनरल वादिम स्किबित्स्की ने अगस्त में ये चिंताएं जाहिर की थीं। उन्होंने कहा था कि यूक्रेन को अब नई इंटरसेप्टर मिसाइलों की जरूरत है, जिनमें नवीनतम जेट इंजन चालित गेरेन ड्रोन को रोकने के लिए ‘‘उपयुक्त गति’’ हो।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश