पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पांच जुलाई से जारी आतंकवाद विरोधी अभियान में 88 आतंकवादी मारे गए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पांच जुलाई से जारी आतंकवाद विरोधी अभियान में 88 आतंकवादी मारे गए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पांच जुलाई से जारी आतंकवाद विरोधी अभियान में 88 आतंकवादी मारे गए
Modified Date: July 11, 2026 / 07:19 pm IST
Published Date: July 11, 2026 7:19 pm IST

कराची, 11 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को कहा कि बलूचिस्तान प्रांत में पांच जुलाई से जारी बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अब तक कम से कम 88 आतंकवादी मारे गए हैं।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक बयान में कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान नौ आतंकवादी मारे गए।

उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन शबान के तहत पांच जुलाई से अब तक मारे गए आतंकवादियों की कुल संख्या 88 हो गई है।’’

नकवी ने बताया कि जारी अभियान में सेना, अर्द्धसैनिक बल ‘रेंजर्स’ और फ्रंटियर कोर हिस्सा ले रहे हैं।

अभियान के तहत आतंकवादियों के खिलाफ जमीनी और हवाई दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है।

यह अभियान पांच जुलाई को बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादियों द्वारा किए गए समन्वित हमलों के बाद शुरू किया गया था।

सबसे घातक हमला जियारत जिले के मंगी बांध स्थित एक पुलिस चौकी पर हुआ, जहां आतंकवादियों ने नौ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी और 18 अन्य का अपहरण कर लिया।

अधिकारियों ने बताया कि बाद में अपहृत पुलिसकर्मियों के शव जियारत के निकट जरघून गार पर्वतीय क्षेत्र से बरामद किए गए।

इस बीच, मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजन न्याय और सुरक्षाकर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग को लेकर क्वेटा के बाहरी इलाके स्थित कोयला फाटक चौक पर धरना जारी रखे हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को क्वेटा के सरकारी अस्पताल से 18 में से आठ पुलिसकर्मियों के शव धरनास्थल पर रखकर कहा कि जब तक सरकार उन्हें न्याय और पुलिसकर्मियों की बेहतर सुरक्षा का भरोसा नहीं देती, तब तक वे उनका अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

पांच जुलाई को ही आतंकवादियों ने क्वेटा के निकट हन्ना उरक घाटी के एक जनजातीय समुदाय के लोगों पर भी हमला किया था जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई, आठ अन्य घायल हो गए और 11 लोगों का अपहरण कर लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अपहृत लोगों को शुक्रवार रात छुड़ा लिया गया, जिसके बाद उनके परिजनों ने क्वेटा के एयरपोर्ट रोड के निकट जारी अपना धरना समाप्त कर दिया।

बलूचिस्तान में पिछले लगभग दो दशकों से अशांति का माहौल है।

स्थानीय बलूच जातीय समूहों और राजनीतिक दलों का आरोप है कि संघीय सरकार प्रांत की खनिज संपदा का शोषण कर रही है।

भाषा रवि कांत रवि कांत जितेंद्र

जितेंद्र


लेखक के बारे में