समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि: समुद्री जीवन पर क्या असर पड़ेगा

समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि: समुद्री जीवन पर क्या असर पड़ेगा

समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि: समुद्री जीवन पर क्या असर पड़ेगा
Modified Date: July 18, 2026 / 05:49 pm IST
Published Date: July 18, 2026 5:49 pm IST

(जूल्स बी. कजतार, नेशनल ओशनोग्राफी सेंटर और जो जैकब्स, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैंप्टन)

साउथैंप्टन (ब्रिटेन), 18 जुलाई (द कन्वरेशन) समुद्र में डुबकी लगाने से गर्मी के मौसम में कुछ राहत मिल सकती है, खासतौर पर जब पानी का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो। हाल के दिनों में ब्रिटेन के दक्षिणी हिस्से में समुद्र का तापमान इस स्तर तक पहुंच गया, जो सामान्य स्थिति नहीं है। देश के समुद्री क्षेत्रों में पिछले चार वर्षों के दौरान तीसरी बार समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि देखने को मिली है।

लोगों के लिए इसके स्पष्ट दुष्प्रभाव हैं, जैसे खुले समुद्र में डूबने की घटनाओं का बढ़ना। लेकिन समुद्र के तापमान में इस वद्धि का असर केवल मानव पर नहीं पड़ता। इसका प्रभाव सूक्ष्म प्लवकों से लेकर विशाल व्हेल तक, समुद्री जीवों की लगभग सभी प्रजातियों पर पड़ता है।

दुनिया भर में पांच दिन या उससे अधिक समय तक समुद्र का तापमान असामान्य रूप से अधिक रहने की घटनाओं ने समुद्री शैवाल (केल्प), समुद्री घास और प्रवाल भित्तियों जैसी समुद्री पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियों का बड़े पैमाने पर विनाश किया है।

समुद्र का तापमान बढ़ने के कारण समुद्री स्तनधारियों, शंख-सीप जैसे जीवों और उन पर निर्भर समुद्री पक्षियों सहित कई अन्य प्रजातियों की मौतें हुई हैं या उनके जीवन-चक्र में बदलाव आया है। कई प्रजातियों को अपना पारंपरिक आवास छोड़कर दूसरे क्षेत्रों की ओर जाना पड़ा है। इन सभी परिवर्तनों से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ता है और समुद्री खाद्य श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता है।

ब्रिटेन में समुद्र के तापमान में पहली बड़ी वृद्धि जून 2023 में दर्ज की गई थी। इसके बाद मई 2025 और अब जुलाई 2026 में फिर ऐसी स्थिति बनी है। हालांकि, तापमान में इस वृद्धि के प्रभावों के ठोस प्रमाण अभी सीमित हैं, क्योंकि इनके कई दुष्परिणाम धीरे-धीरे सामने आते हैं या उन्हें समझने में वर्षों लग जाते हैं।

ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी को हानिकारक ‘एल्गल ब्लूम’ से भी जोड़ा गया है। जब पोषक तत्वों की प्रचुरता, गर्म पानी, कड़ी धूप और शांत समुद्री परिस्थितियां एक साथ मिलती हैं, तो सूक्ष्म शैवाल तेजी से बढ़ने लगते हैं।

ये शैवाल ऐसे विषैले तत्व पैदा कर सकते हैं, जो पानी को छानकर भोजन करने वाले शेलफिश के शरीर में जमा हो जाते हैं। यदि लोग ऐसे शेलफिश का सेवन करें, तो वे गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं या उनकी मृत्यु भी हो सकती है। इसी वजह से ब्रिटेन सरकार खाद्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर समुद्री जैव-विषों की लगातार निगरानी करती है।

गर्म समुद्री जल के कारण ही संभवतः डेवोन और कॉर्नवाल के दक्षिणी तटों पर ऑक्टोपस की संख्या असामान्य रूप से बढ़ी है। ये ऑक्टोपस केकड़ों और लॉब्स्टर का शिकार कर रहे हैं, जिससे स्थानीय मत्स्य उद्योग की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कुछ क्षेत्रों में मछुआरों ने अब ऑक्टोपस पकड़ने पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया है।

हाल के दिनों में जेलीफिश दिखाई देने की घटनाओं में बढ़ोतरी को भी समुद्र के तापमान में वृद्धि का संभावित परिणाम माना जा रहा है। हालांकि, शुरुआती संकेत बताते हैं कि इसकी एक वजह समुद्र तटों पर लोगों की बढ़ती मौजूदगी और उनके द्वारा अधिक संख्या में ऐसी घटनाओं की सूचना देना भी हो सकता है।

मछुआरों के अनुभव बताते हैं कि ठंडे पानी में रहने वाली कॉड जैसी मछलियां अब उत्तर की ओर जा रही हैं। इसका असर केवल मछली पकड़ने पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि समुद्री पक्षियों के प्रजनन और उनके अस्तित्व पर भी पड़ सकता है।

मत्स्य संसाधनों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में होने वाले इन बदलावों के कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी बेहद व्यापक होते हैं।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 2011 में लगातार बढ़ते समुद्री तापमान के बाद पहली बार ‘समुद्री हीटवेव’ शब्द प्रचलन में आया था। उस दौरान समुद्री घास के विशाल मैदान नष्ट हो गए थे। साथ ही केल्प, प्रवाल भित्तियां, मछलियां, एबालोन, झींगे और केकड़ों की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ हिस्सों को सामान्य होने में कई वर्ष लग गए, जबकि कुछ क्षेत्र आज तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

अब भी कई सवालों के जवाब तलाश रहे हैं वैज्ञानिक

अब वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश में जुटे हैं कि समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि के दूरगामी प्रभाव क्या होते हैं और किन समुद्री प्रजातियों को इसका सबसे अधिक खतरा है।

मत्स्य प्रबंधन से जुड़े कदम, जैसे वैज्ञानिक आधार पर मछली पकड़ने की रणनीति बनाना मछलियों की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। ऐसे उपाय जितनी जल्दी लागू किए जाएं, उतना बेहतर होगा।

समुद्री वैज्ञानिकों के समक्ष अब भी कई ऐसे प्रश्न हैं, जिनके उत्तर मिलने बाकी हैं। हाल में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने 40 प्रमुख शोध प्रश्नों की पहचान की है, ताकि ब्रिटेन में समुद्र के तापमान में असामान्य वद्धि से जुड़े जोखिम और संभावित अवसरों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

द कन्वरसेशन

खारी सुभाष

सुभाष


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