किशोर की हत्या करने वाले ब्रिटिश सिख युवक की मां को हत्या में इस्तेमाल हथियार हटाने पर जेल

किशोर की हत्या करने वाले ब्रिटिश सिख युवक की मां को हत्या में इस्तेमाल हथियार हटाने पर जेल

किशोर की हत्या करने वाले ब्रिटिश सिख युवक की मां को हत्या में इस्तेमाल हथियार हटाने पर जेल
Modified Date: July 18, 2026 / 06:07 pm IST
Published Date: July 18, 2026 6:07 pm IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 18 जुलाई (भाषा) दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड के साउथम्पटन में एक किशोर की चाकू मारकर हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक ब्रिटिश सिख युवक की मां को हत्या में इस्तेमाल हथियार घटनास्थल से हटाने के आरोप में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।

किरण कौर (53) को शुक्रवार को साउथम्पटन क्राउन कोर्ट ने अपराधी की मदद करने का दोषी ठहराया था, जिसके बाद उसे तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

भारत में जन्मी किरण कौर को अपने बेटे विक्रम डिगवा द्वारा हेनरी नोवाक की हत्या में इस्तेमाल हथियार अपने कब्जे में लेने और जांच में बाधा डालने के उद्देश्य से उसे घटनास्थल से हटाने का दोषी पाया गया।

ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) की वरिष्ठ अभियोजक केली न्यूमैन ने कहा, ‘‘हेनरी नोवाक की हत्या उस समय कर दी गई थी जब वह महज 18 वर्ष का था। हमारी संवेदनाएं उसके परिवार और प्रियजनों के साथ हैं, जिन्होंने अपूरणीय क्षति झेली है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘डिगवा ने इस निरर्थक हिंसा के बाद पुलिस से झूठ बोला और इसके तुरंत बाद किरण कौर ने हत्या में इस्तेमाल हथियार हटाकर तथा महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाकर अपने बेटे की मदद करने का चयन किया जिसका उद्देश्य जांच में बाधा डालना था।’’

न्यूमैन ने कहा, ‘‘जो लोग हत्यारों को कानून से बचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि उन्हें भी अपने कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।’’

डिगवा ने तीन दिसंबर 2025 को 18 वर्षीय नोवाक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। पिछले महीने 23 वर्षीय डिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसमें उसे पैरोल के लिए पात्र होने से पहले कम से कम 21 वर्ष जेल में बिताने होंगे।

इस मामले को लेकर उस समय विवाद खड़ा हो गया था, जब आरोपी ने यह दलील दी कि हत्या में इस्तेमाल हथियार ‘कृपाण’ था, जिसे सिख धार्मिक परंपरा के तहत ब्रिटेन में कानूनी रूप से रखने की अनुमति है और उसने इसे आत्मरक्षा का मामला बताने की कोशिश की।

किरण कौर को सजा सुनाते हुए न्यायाधीश विलियम मूसले ने कहा, ‘‘सिख धर्म का यह मूल सिद्धांत है कि कृपाण धार्मिक आस्था का प्रतीक है और इसे कभी भी आक्रामक उद्देश्य से नहीं रखा जाता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्पष्ट है कि कृपाण का उपयोग तभी उचित माना जा सकता है, जब अत्यंत गंभीर और तत्काल खतरे की स्थिति हो। आपको इसका पूरा ज्ञान था।’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार अभिभावक अपने बेटे के कृत्य पर उससे सवाल करता और उसे सही काम करने के लिए प्रेरित करता। इसके बजाय आप चाकू घर ले गईं और उसे अपने बेटों के कमरे में रखे अन्य औपचारिक तथा दूसरे हथियारों के साथ रख दिया।’’

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि किरण कौर ने भारत में कठिन जीवन बिताया था, लेकिन लगभग 30 वर्ष पहले विवाह के बाद ब्रिटेन आने पर उनका जीवन बेहतर हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने बेटे की रक्षा करने की गलत मंशा से यह कदम उठाया। आपके दोबारा अपराध करने की संभावना बहुत कम है।’’

इस बीच, दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके सांसद रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘किरण कौर ने अपने बेटे के साथ मिलकर उस समय हेनरी को नस्लवादी साबित करने की कोशिश की, जब वह सड़क पर तड़प रहा था। स्पष्ट रूप से, एक भारतीय नागरिक होने के नाते उसे अपने मूल देश भेजा जाना चाहिए, जहां वह एक लंबी सजा काटे।’’

डिगवा के बड़े भाई गुरप्रीत और पिता मोगा सिंह के खिलाफ अपराध में सहायता करने के आरोपों पर कानूनी कार्यवाही अभी जारी है।

वहीं, डिगवा की 21 वर्ष की न्यूनतम अवधि वाली आजीवन कारावास की सजा की भी अपीलीय अदालत में समीक्षा की जा रही है।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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