अफगानिस्तान: सहायता में कटौती होने से जरूरतमंद बच्चों की मदद नहीं कर पा रहा डब्ल्यूएफपी

अफगानिस्तान: सहायता में कटौती होने से जरूरतमंद बच्चों की मदद नहीं कर पा रहा डब्ल्यूएफपी

अफगानिस्तान: सहायता में कटौती होने से जरूरतमंद बच्चों की मदद नहीं कर पा रहा डब्ल्यूएफपी
Modified Date: February 19, 2026 / 02:19 pm IST
Published Date: February 19, 2026 2:19 pm IST

काबुल, 19 फरवरी (एपी) अफगानिस्तान में अत्यधिक कुपोषित ढाई साल के अबू बकर का वजन मात्र छह किलोग्राम (13 पाउंड) है, जो उसके सामान्य वजन का लगभग आधा है। उसका परिवार उसे एक महिने पहले काबुल के इंदिरा गांधी बाल अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टर उसका उपचार कर रहे हैं।

हालांकि प्रत्येक कुपोषित बच्चे को उपचार मिले, ऐसा नहीं हो पाता और ऐसे कई बच्चे होते हैं, जिन्हें मदद नहीं मिल पाती।

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के अफगानिस्तान कंट्री डायरेक्टर जॉन आयलीफ ने कहा, ‘हमारे सामने एक भयावह पोषण संकट है, जिसमें देश का दो-तिहाई गंभीर कुपोषण के संकट में है। देश में कुपोषण में अब तक की सबसे भारी वृद्धि दर्ज की गई है। 40 लाख बच्चों का जीवन अधर में है।”

चार दशकों के संघर्ष से तबाह अफगानिस्तान लंबे समय से विदेशी सहायता पर निर्भर रहा है। हालांकि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद प्रत्यक्ष विदेशी सहायता लगभग बंद हो गई, जिससे लाखों लोग गरीबी और भुखमरी की चपेट में आ गए। एक कमजोर अर्थव्यवस्था होने के साथ ही भीषण सूखा, 2025 के अंत में आए दो विनाशकारी भूकंप और पड़ोसी पाकिस्तान और ईरान से निकाले गए 53 लाख अफगानों के आने से स्थिति और भी जटिल हो गई।

अब, मानवीय सहायता संगठनों को दी जाने वाली धनराशि में कटौती होने से लाखों लोग मुश्किल में आ गए हैं। इसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के खाद्य वितरण जैसे कार्यक्रमों के लिए अमेरिकी सहायता को रोका जाना भी शामिल है।

आयलीफ ने बताया, “सहायता में कटौती विनाशकारी साबित हुई है।” उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से कुपोषित 40 लाख बच्चों में से “हमें अब चार में से तीन बच्चों को वापस भेजना पड़ रहा है क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं हैं। यह अभूतपूर्व है और मैंने अपने 30 से अधिक वर्षों के करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।”

भीषण भूख का सामना कर रहे 1.74 करोड़ लोगों में से, संगठन अब केवल 20 लाख लोगों तक ही पहुंच पा रहा है और उनके लिए भी संगठन कम भोजन उपलब्ध कराने के लिए मजबूर है।

एपी तान्या अमित

अमित


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