MP Suicide Incidents Data: हर दिन 44 लोग खत्म कर रहे हैं अपनी जिंदगी, 26 महीनों में 32 हजार से ज्यादा आत्महत्याएं.. प्रदेश में आंकड़े हैरान करने वाले

Madhya Pradesh Suicide Incidents Data: मध्य प्रदेश में 26 महीनों में 32 हजार से अधिक आत्महत्याएं दर्ज, छात्रों और किसानों की संख्या चिंताजनक।

MP Suicide Incidents Data: हर दिन 44 लोग खत्म कर रहे हैं अपनी जिंदगी, 26 महीनों में 32 हजार से ज्यादा आत्महत्याएं.. प्रदेश में आंकड़े हैरान करने वाले

Madhya Pradesh Suicide Incidents Data || Image- Symbolic (Canva)

Modified Date: February 19, 2026 / 03:31 pm IST
Published Date: February 19, 2026 3:05 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 26 महीनों में 32 हजार सुसाइड
  • छात्र और किसान सबसे प्रभावित
  • मानसिक स्वास्थ्य बड़ा कारण

भोपाल: बदलती जीवनशैली, बेरोजगारी, गरीबी और निजी कारणों से देशभर में सुसाइड के मामले बढ़ रहे हैं। अपनी जान देने वालों में ज्यादातर स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जो अक्सर पढ़ाई और बेहतर प्रदर्शन के दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। (Madhya Pradesh Suicide Incidents Data) बात करें देश के बड़े राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश की, तो यहां सुसाइड के चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए गए हैं। प्रदेश में 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच हुए सुसाइड के आंकड़े मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, इन 26 महीनों के भीतर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुल 32 हजार 385 सुसाइड के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें किसान, स्टूडेंट्स और मजदूर वर्ग के लोग शामिल हैं। जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 562 किसान, 667 कृषक मजदूर और 987 स्टूडेंट्स शामिल हैं। वहीं दो किसानों ने फसल खराब होने की वजह से खुदकुशी कर ली थी। हालांकि सरकार का दावा है कि मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

भारत में क्या हैं आत्महत्या की प्रमुख वजहें?

आत्महत्याओं के अनेक जटिल कारण हैं। इनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, शैक्षणिक दबाव, सामाजिक-आर्थिक समस्याएं, प्रेम संबंधों में विफलता, व्यसन और घरेलू हिंसा प्रमुख हैं। भारत में युवाओं पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ काफी ज्यादा है, लेकिन उनमें से ज्यादातर इसका उपचार नहीं कराते। (Madhya Pradesh Suicide Incidents Data) परीक्षाओं में सफलता का अत्यधिक दबाव, अभिभावकों और शिक्षकों की अपेक्षाएं और विफलता का डर युवाओं को आत्महत्या की ओर धकेल सकता है।

गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक बहिष्कार, भेदभाव और परिवार में तनाव भी आत्महत्या के जोखिम कारक हैं। युवाओं के बीच इंटरनेट के उपयोग में हुई वृद्धि भी इसमें भूमिका निभाती है। इसके अन्य कारकों में साइबर बुलिंग, लैंगिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और सामाजिक मूल्यों में गिरावट शामिल हैं।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आत्महत्या का एक बड़ा कारण हैं। भारत में लगभग 54 फीसदी आत्महत्याएं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण होती हैं। शैक्षणिक तनाव से होने वाली आत्महत्याओं के मामले लगभग 23 फीसदी पाए गए हैं। इसी तरह सामाजिक और जीवनशैली कारकों का लगभग 20 फीसदी और हिंसा का 22 फीसदी योगदान रहता है।

इसके अलावा आर्थिक संकट के कारण 9.1 फीसदी और संबंधों की वजह से लगभग 9 फीसदी आत्महत्याएं होती हैं। युवा लड़कियों और महिलाओं में कम उम्र में विवाह, कम उम्र में मां बनना, (Madhya Pradesh Suicide Incidents Data) निम्न सामाजिक स्थिति, घरेलू हिंसा, आर्थिक निर्भरता और लैंगिक भेदभाव भी इसके प्रमुख कारण हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्ष 2022 में परीक्षा में विफलता के कारण 2095 लोगों ने आत्महत्या की थी।

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