( ल्यूक हीम्सबर्गेन, दाइकिन यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 23 सितंबर (द कन्वरसेशन) एप्पल वॉच के नवीनतम मॉडल कुछ ऐसे नए फीचर्स के साथ आए हैं जो दिनभर आपके आस-पास की आवाजों को सुन सकते हैं, मांग करने पर बातचीत के अंशों का प्रतिलेखन यानी ट्रांसक्रिप्शन कर सकते हैं और सुनी गई हर बात का सारांश भी तैयार कर सकते हैं।
हर समय ऑन रहने वाली इस तरह की ‘सराउंडिंग सर्विलांस’ (परिवेशी निगरानी) ने निजता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
एप्पल ने इन चिंताओं का बखूबी जवाब दिया है। कंपनी का कहना है कि ऑडियो कभी ‘‘रिकॉर्ड’’ या स्टोर नहीं किया जाता, न ही किसी आवाज को किसी खास व्यक्ति से जोड़ा जाता है। साथ ही, सारा डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होता है जिससे स्वयं एप्पल भी इसे नहीं पढ़ सकता। इस सुरक्षा तकनीक पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है, लेकिन इसके बावजूद इन फीचर्स को लेकर आम लोगों में एक असहजता साफ देखी जा रही है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
—– कमरे की बात कमरे में ही रहनी चाहिए —–
ये नए फीचर्स प्राइवेसी संबंधी कानूनों के साथ-साथ बातचीत से जुड़े सामाजिक मानदंडों के आड़े आ सकते हैं। जब हम दूसरों से बात करते हैं, तो हमारी एक स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि हमारी बातें उसी दायरे तक सीमित रहेंगी। इसे सूचना वैज्ञानिक हेलेन निसेनबाम ‘सार्थक संदर्भ’ (कॉन्टेक्स्टुअल इंटीग्रिटी) कहती हैं—यानी यह उम्मीद कि जानकारी उसी माहौल के नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी जिसमें इसे साझा किया गया है।
किसी कैफे की मेज पर, डिनर पार्टी में या किसी बैठक में कही गई बातें वहीं मौजूद लोगों के लिए होती हैं, न कि किसी ‘स्वत: सारांश’ के जरिए किसी दूसरे के सर्च करने योग्य लाइफ रिकॉर्ड का हिस्सा बनने के लिए।
—– ‘ऑप्ट-इन’ का विकल्प सबके लिए नहीं —–
एप्पल भले ही इसे ‘ऑप्ट-इन’ (उपयोगकर्ता की मर्जी पर निर्भर) फीचर कह रहा हो, लेकिन इसे चालू करने का अधिकार केवल घड़ी पहनने वाले के पास है, कमरे में मौजूद बाकी लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होता। कंपनी शायद इस समस्या को समझती है, इसीलिए मांग पर पिछली 15 सेकंड की बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट यानी ‘लाइव रिवाइंड’ देने पर एक बीप की आवाज, एनीमेशन और माइक का संकेत देता है। लेकिन दिनभर बैकग्राउंड में काम करने वाले और बाद में सारांश बनाने वाले ‘सिरी रीकैप’ में ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता।
ज़ाहिर है कि लगातार बीप बजना या लाइट चमकना घड़ी को पहनने लायक नहीं छोड़ेगा। यही कारण है कि जहां गोपनीयता की उम्मीद की जाती है, वहां ऐसे उपकरणों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मेटा के वीडियो रिकॉर्डिंग वाले स्मार्ट चश्मों को पहले ही कई कार्यस्थलों और कार्यक्रमों में प्रतिबंधित किया जा चुका है।
—– साख और भरोसे का संकट —–
टेक कंपनियों का उपयोगकर्ता के डेटा का दुरुपयोग करने का एक पुराना इतिहास रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि हजारों ऐप्स अपनी ही प्राइवेसी नीतियों का उल्लंघन करते हैं। अधिकतर लोग पहले से ही यह मानते हैं कि उनके फोन विज्ञापन दिखाने के लिए उनकी बातें चुपके से सुनी जाती हैं। ऐसे में कलाई पर एक और ऐसा फीचर लाना जनता के अविश्वास को ही बढ़ाएगा।
एप्पल खुद 2025 में 9.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हर्जाना भुगत चुका है, जब उन पर आरोप लगा था कि ‘सिरी’ गलती से सक्रिय हो जाती थी और निजी ऑडियो कॉन्ट्रैक्टर्स को भेज देती थी।
—– एक सुरक्षित लेकिन चुनौतीपूर्ण बदलाव —–
यह सही है कि एप्पल दूसरों की तुलना में प्राइवेसी को बेहतर ढंग से संभाल रहा है। उसका ‘प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट इस तरह बनाया गया है कि कंपनी के कर्मचारी भी डेटा नहीं देख सकते। एप्पल ने इसके सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक करने का भी वादा किया है ताकि स्वतंत्र शोधकर्ता इसकी जांच कर सकें।
अतीत में एप्पल के आईपॉड और एयरपॉड्स ने सामाजिक आदतों को बदला है, लेकिन हर तकनीक सफल हो यह जरूरी नहीं । जैसे 2024 में लॉन्च हुआ विजन प्रो चश्मा अभी भी उतना लोकप्रिय नहीं हो सका है।
मूल समस्या यह है कि एप्पल जिस तकनीक को बेच रहा है, वह एक नया सामाजिक मानदंड स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि किसी भी बातचीत को आसानी से कैप्चर, विश्लेषित और कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि हमारी बातचीत की गोपनीयता को बचाए रखने के लिए इस बदलाव को ‘‘ना’’ कहना बेहद जरूरी है।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश