बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों में बीएनपी ने बनाई बढ़त
बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों में बीएनपी ने बनाई बढ़त
(फोटो के साथ)
ढाका, 12 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) बृहस्पतिवार को हुए महत्वपूर्ण आम चुनाव में जमात-ए-इस्लामी पर बढ़त बनाए हुए प्रतीत हो रही है।
नयी सरकार अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में अवामी लीग शासन के सत्ता से बेदखल होने के बाद कार्यभार संभाला था।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि शुरुआती नतीजों में बीएनपी को बढ़त मिली है और उसके उम्मीदवार 175 से अधिक सीटों पर आगे हैं, जबकि जमात के उम्मीदवार 30 सीटों पर आगे हैं।
संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह के साथ मतदान शाम 4.30 बजे समाप्त हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, अपराह्न दो बजे तक 48 प्रतिशत मतदान हुआ।
गैर आधिकारिक परिणामों में, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की।
जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष शफीकुर रहमान राजधानी की एक सीट से मुकाबले में सबसे आगे हैं, जबकि जमात महासचिव मिया गोलम पोरवार दक्षिण-पश्चिमी खुलना निर्वाचन क्षेत्र में अपने बीएनपी प्रतिद्वंद्वी अली असगर लॉबी से चुनाव हार गए हैं।
बांग्लादेश में जटिल 84 सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के साथ-साथ 13वां आम चुनाव कराया गया। सुधार पैकेज को ‘जुलाई राष्ट्रीय घोषणापत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।
देश भर में 300 में से 299 संसदीय सीट पर मतदान सुबह साढ़े सात बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ और शाम साढ़े चार बजे तक जारी रहा। हालांकि, जिन जगहों पर मतदाता मतदान केंद्र के अंदर थे, वहां उनके मतदान करने तक मतदान जारी रहा।
वहीं, एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु होने के कारण मतदान रद्द कर दिया गया।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग की गैरमौजूदगी में मुख्य मुकाबला बीएनपी और उसकी पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच है। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
ग्यारह दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात ने हिंसा और अनियमितताओं की कुछ छिटपुट घटनाओं का आरोप लगाने के बावजूद, मतदान को ‘‘शानदार’’ बताया और उम्मीद जताई कि वह ‘‘भारी जीत’’ हासिल करेगी।
बीएनपी चुनाव संचालन समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने कहा कि उनकी पार्टी की जीत ‘‘अपरिहार्य और स्पष्ट’’ है।
सरकारी ‘बीएसएस’ समाचार एजेंसी के मुताबिक निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने कहा कि देशभर में अपराह्न दो बजे तक लगभग 48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद, मुख्य सलाहकार यूनुस ने आम चुनाव और जनमत संग्रह में भागीदारी के लिए लोगों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद भी लोकतांत्रिक गरिमा, सहिष्णुता और आपसी सम्मान बनाए रखने का आह्वान करता हूं। मतभेद रहेंगे, लेकिन राष्ट्रीय हित में हमें एकजुट रहना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक जवाबदेह, समावेशी और न्याय-आधारित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से आगे बढ़ेंगे। आइए लोकतंत्र को मजबूत करने की इस यात्रा में मिलकर काम करें।’’
यूनुस ने चुनाव और जनमत संग्रह को ‘‘नया बांग्लादेश’’ बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर बताया।
इससे पहले, बीएनपी और जमात दोनों के शीर्ष नेताओं ने हेरफेर की आशंका जताई थी और कहा था कि अगर चुनाव ‘‘स्वतंत्र, एवं निष्पक्ष तरीके से’’ होते हैं तो वे चुनाव के नतीजों को स्वीकार करेंगे।
बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने ढाका के रिहायशी गुलशन इलाके में स्थित गुलशन मॉडल स्कूल एवं कॉलेज में बने मतदान केंद्र में अपना वोट डाला।
बीएनपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहमान (60) ने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी 15 वर्षों के राजनीतिक सूखे के बाद सत्ता हासिल करेगी, लेकिन उन्होंने परिणाम समय पर जारी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अगर चुनाव ‘‘स्वतंत्र, निष्पक्ष, तटस्थ तरीके से और बिना किसी विवाद के’’ होते हैं तो बीएनपी परिणामों को स्वीकार करेगी।
वहीं, जमात को शफीकुर रहमान (67) के नेतृत्व में संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश में पहली इस्लामवादी नेतृत्व वाली सरकार बनाने की उम्मीद है।
शफीकुर ने कहा, ‘‘हम ऐसे नतीजे चाहते हैं जो निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए आएं। अगर मतदान स्वतंत्र और निष्पक्ष होगा तो हम नतीजे को स्वीकार करेंगे। दूसरों को भी इसे स्वीकार करना चाहिए। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। हम यही चाहते हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में फर्जी वोट डालने का प्रयास किया गया और कई स्थानों पर उनके पोलिंग एजेंटों पर हमला किया गया।
बीएनपी और जमात दोनों ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से नतीजे आने तक मतदान केंद्रों पर रहने को कहा है।
निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया, जो देश के चुनावी इतिहास में सुरक्षाकर्मियों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
मतदान के दौरान हिंसा रोकने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लगभग 9,00,000 कर्मियों को तैनात किया गया। प्रशासन ने राजधानी के प्रमुख इलाकों में बख्तरबंद वाहन (एपीसी) और त्वरित कार्यबल (आरएटी) तैनात किए। पहली बार, चुनाव सुरक्षा के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।
देश भर में 299 निर्वाचन क्षेत्रों में 42,779 मतदान केंद्रों पर लगभग 12.7 करोड़ मतदाता अपने मत डालने के लिए पंजीकृत थे। इनमें से 50 लाख पहली बार के मतदाता हैं।
कुल 50 राजनीतिक दलों के कुल 1,755 उम्मीदवार और 273 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बीएनपी ने सबसे अधिक 291 उम्मीदवार उतारे हैं। चुनाव में 83 महिला उम्मीदवार हैं।
दशकों में यह बांग्लादेश का पहला चुनाव है जिसमें कोई महिला नेता सुर्खियों में नहीं है। हसीना को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, और उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया की लंबी बीमारी के बाद दिसंबर में मृत्यु हो गई। दोनों महिलाओं ने करीब चार दशकों तक देश की राजनीति पर दबदबा बनाए रखा।
कई जगहों से चुनावी हिंसा की खबरें आईं।
‘बीडीन्यूज24’ की खबर के अनुसार, गोपालगंज में बम हमले में 13 वर्षीय लड़की सहित तीन लोग घायल हो गए।
एक अन्य घटना में मुंशीगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केंद्र के बाहर सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए, जिससे मतदान अस्थायी रूप से बाधित हो गया।
इसके अलावा, खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प के दौरान एक बीएनपी नेता की मौत हो गई।
करीब 81 स्थानीय संगठनों के 55,454 पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निगरानी की, जबकि विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की संख्या 394 रही। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में से 80 विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से हैं, जबकि बाकी अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें स्वतंत्र यूरोपीय पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।
‘इत्तेफाक’ अखबार के अनुसार, उत्तर पश्चिमी जॉयपुरहाट के कलाई इलाके में एक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच मतपत्रों की फोटोकॉपी वितरित करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
‘डेली स्टार’ की खबर के अनुसार, उत्तर पूर्व सिलहट के बालागंज उप-जिले में ‘‘मतपत्रों की हेराफेरी के आरोपों में जमात और बीएनपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई’’, जहां एक स्थानीय जमात नेता और कई अन्य लोग आधी रात के आसपास एक मतदान केंद्र में घुस गए तभी बीएनपी कार्यकर्ताओं ने उन पर धावा बोला, जिसके परिणामस्वरूप हाथापाई हुई और सुरक्षा हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी।
राजधानी ढाका में पुलिस ने वोट खरीदने के आरोप में एक जमात नेता को गिरफ्तार किया, जबकि मतदान से कुछ घंटे पहले दक्षिण-पश्चिमी गोपालगंज में सात मतदान केंद्रों के पास देसी बम विस्फोट हुए।
भाषा आशीष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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