US-Iran Ceasefire News: क्या अमेरिका के लिए हार है ईरान से सीजफायर? ट्रंप ने आखिर क्यों किया सरेंडर? 5 पॉइंट्स में समझे पूरा माजरा
US-Iran Ceasefire News: वाशिंगटन को तेहरान की शर्तों पर अस्थाई समझौता करना पड़ा है। अमेरिका में इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना हो रही है
US-Iran Ceasefire News/Image Credit: IBC24.in
- वाशिंगटन को तेहरान की शर्तों पर अस्थाई समझौता करना पड़ा है।
- अमेरिका के भीतर इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना तेज हो गई है।
- व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कैरोलिना लैविट ने ईरान सीजफायर को अमेरिका की जीत बताया है।
US-Iran Ceasefire News: नई दिल्ली: पहले ईरान पर जमकर हमला करना, फिर पूरी सभ्यता को बर्बाद करने की धमकी देना और अचानक से युद्ध विराम की घोषणा कर देना। 39 दिन तक मिडिल ईस्ट में चले युद्ध में ईरान ने अमेरिका में जमकर तबाही मचाई। बताया जा रहा है कि, करीब 40 बिलियन डॉलर खर्च करके भी अमेरिका ईरान में कुछ खास हासिल नहीं कर पाया। वहीं अब वाशिंगटन को तेहरान की शर्तों पर अस्थाई समझौता करना पड़ा है। अमेरिका के भीतर इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना तेज हो गई है। (US-Iran Ceasefire News) हालांकि, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कैरोलिना लैविट ने ईरान सीजफायर को अमेरिका की जीत बताया है।
कहा जा रहा है कि, असल में यह ईरान की जीत है। ऐसा इसलिए क्योंकि, जंग से पहले जिन शर्तों को लेकर ईरान पर दबाव था, वो अब काफी पीछे छूट चुका है। ईरान अब खुद की शर्तों पर समझौता चाहता है. अमेरिका ने भी इसकी हामी दे दी है। इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेन्नेट ने इसे इजराइल के लिए आत्मघाती करार दिया है।
5 पॉइंट्स में समझे क्यों है अमेरिका की हार
US-Iran Ceasefire News: 1. अमेरिका की सूची में अब तक ईरान से समझौते की पहली शर्त संवर्धित यूरेनियम को शिफ्ट करना रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव आ गया है। 2 हफ्ते का जो समझौता हुआ है, उसमें ईरान की तरफ से सिर्फ होर्मुज को खोला जाएगा। वो भी सशर्त, ईरान टोल लेकर होर्मुज से जहाजों को गुजरने देगा। अब तक होर्मुज से जहाजों का गुजरना मुफ्त था।
2. अमेरिका ने सीजफायर आनन-फानन में किया है। सीजफायर में सिर्फ खुद का हित देखा है। (US-Iran Ceasefire News) INSS के सीनियर फेलॉ डेनिस सिट्रिनोविच का कहना था कि जंग की लागत लगातार बढ़ रही थी। अमेरिका इसलिए इससे बाहर निकलना चाह रहा था। आखिर में उसने ईरान के प्रस्ताव को मान लिया। सीजफायर के लिए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगियों से भी कोई बात नहीं की।
3. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मॉर्फी ने इसे आत्मसमर्पण बताया है। मॉर्फी का कहना है कि ट्रंप ने जिस तरीके से एक दिन पहले आए ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार किया है, वो आत्मसमर्पण है। वो भी ऐसे वक्त में जब ईरान काफी कमजोर स्थिति में है। इसके बावजूद पूरी दुनिया को यह संदेश चला गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है, इसे अमेरिका वापस नहीं ले पाया।
US-Iran Ceasefire News: 4. डेनिस सिट्रिनोविच के मुताबिक आगे की जो वार्ता होगी, उसमें अमेरिका अब जंग की धौंस नहीं दे सकता है। (US-Iran Ceasefire News) समझौता अब सिर्फ व्यावसायिक हितों के आधार पर हो सकता है। ईरान अब अमेरिकी जंग से नहीं डरने वाला है. उसने जंग में सबसे बुरी स्थिति देख ली है।
5. ईरान जंग की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने तख्तापलट की बात कही थी, लेकिन 40 दिन बाद भी ईरान पर इस्लामिक गणराज्य की मजबूत पकड़ है। ट्रंप ने समझौते के लिए भी इस्लामिक गणराज्य के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई से ही संपर्क साधा। इतना ही नहीं, उन्होंने एक पोस्ट में मुज्तबा को कम कट्टरपंथी नेता बताया है।
ईरान की शर्तों को ट्रंप ने बताया बेहतरीन
US-Iran Ceasefire News: एक न्यूज एजेंसी से बात करते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शर्तों को बेहतरीन बताया है। ट्रंप ने कहा कि इसमें सब कुछ है। अधिकांश पर हमारी सहमति बन गई है. कुछ पर हम बात कर रहे हैं। जिन लोगों को इसके बारे में पता नहीं है, वही इसे गलत बोल रहे हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका का मकसद पूरा हो चुका है। (US-Iran Ceasefire News) ईरान सैन्य स्तर पर पूरी तरह टूट चुका है। अब ईरान हमारे लिए खतरा नहीं है।
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