(हाकान योहानसन और एक्सेल विकस्ट्रॉम, लुंड विश्वविद्यालय)
लुंड (स्वीडन), नौ सितंबर (द कन्वरसेशन) समानता और सादगी स्वीडन की सामाजिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। वहां ‘जांतेलागेन’ नाम की एक धारणा भी प्रचलित है, जो कहती है कि किसी व्यक्ति को खुद को दूसरों से बेहतर नहीं समझना चाहिए।
लेकिन स्वीडन में अरबपतियों को लेकर आकर्षण भी रहा है, खासकर ऐसे अरबपतियों के प्रति जो देश के इन प्रभावशाली सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों के अनुरूप दिखाई देते हैं।
फर्नीचर कंपनी आईकिया के संस्थापक इंग्वार कम्पराड के मामले में स्वीडन के लोगों को यह बात खास तौर पर पसंद थी कि वह पुरानी कार चलाते थे (स्वाभाविक रूप से वोल्वो)। वह अपने स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच जाकर उनसे बातचीत करते थे और हर साल खुद उन्हें क्रिसमस के तोहफे देते थे।
उनका यह साधारण दिखने का अंदाज (जिसे कुछ लोग सोची-समझी रणनीति भी कह सकते हैं) लोगों का ध्यान इस बात से हटा देता था कि कम्पराड दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक थे और स्वीडन के ऊंचे करों से बचने के लिए स्विट्जरलैंड चले गए थे।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने स्वीडन में आए हैरान करने वाले “पूंजीवादी कायापलट” पर लिखा है और ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने इस धारणा पर खबर की है कि यह देश अब “अरबपतियों से भरा गया है।”
बीबीसी ने 2024 में ‘सुपर-रिच स्वेड्स’ नाम से एक वृत्तचित्र पॉडकास्ट भी प्रसारित किया। और इस दिलचस्पी के पीछे ठोस वजहें हैं।
लंबे समय तक स्वीडन दुनिया में सबसे अधिक कर लगाने वाले देशों में शामिल रहा, लेकिन पूंजी और संपत्ति पर कर लगाने के मामले में अब स्थिति अलग है। मसलन, देश में अब संपत्ति कर, विरासत कर या अचल संपत्ति कर नहीं है। ऐसे में समानता पर आधारित सामाजिक आदर्श और समाज के सबसे अमीर तबके में तेजी से बढ़ता संपत्ति का संचय एक-दूसरे से मेल खाते नजर नहीं आते।
पत्रिका ‘फोर्ब्स’ के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर के हिसाब से देखा जाए तो स्वीडन में अरबपतियों की संख्या 50 से अधिक है। महज 1.06 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए यह संख्या और भी असाधारण है।
हमने ‘फोर्ब्स’ और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का इस्तेमाल किया और पाया कि 2025 में प्रति 10 लाख आबादी पर 4.7 अरबपतियों के साथ स्वीडन दुनिया में चौथे स्थान पर था।
वहीं, 10 लाख से कम आबादी वाले छोटे देशों को अलग कर दें तो स्वीडन से आगे केवल सिंगापुर (9.9), हांगकांग (9.1) और साइप्रस (7.3) थे। स्वीडन (4.7) पांचवें स्थान पर मौजूद स्विट्जरलैंड (4.6) से भी आगे था। अमेरिका (2.7), जर्मनी (2.1), कनाडा (2.0) और ब्रिटेन (0.8) जैसी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी स्वीडन की स्थिति काफी ऊपर है।
यह कहना निश्चित तौर पर मुश्किल है कि नियमों में बदलाव और संपत्ति अर्जित करने के चलन ने स्वीडन के सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों को बदला है या नहीं, लेकिन इसके कुछ स्पष्ट संकेत जरूर दिखाई देते हैं। अब युवा पीढ़ी भौतिक सुख-सुविधाओं और संपत्ति को लेकर अपनी आकांक्षाएं खुलकर जाहिर कर रही है।
जब उनसे पूछा जाता है कि जिंदगी में उनके लिए क्या महत्वपूर्ण है, तो दोस्तों के साथ समय बिताने के बाद धन कमाना दूसरे स्थान पर आता है। इसे परिवार के साथ समय बिताने या शिक्षा हासिल करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वीडन के युवा आबादी से लेकर वयस्क आबादी तक, दोनों ही शेयर बाजार में निवेश करके अपनी ऐसी “कमाई की मशीन” तैयार करने का सपना देखते हैं, जो उन्हें सेवानिवृत्ति की उम्र आने से काफी पहले नौकरी छोड़ने की आजादी दे सके। कुछ लोगों को यह बात हैरान कर सकती है, क्योंकि स्वीडन लंबे समय से राजनीतिक और सांस्कृतिक, दोनों स्तरों पर मजबूत कार्य संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है।
एक अध्ययन में हमने पाया कि स्वीडन के टैबलॉयड समाचार पत्र और कारोबारी पत्रिकाओं में अरबपतियों से जुड़ी खबरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इन खबरों में उनके निजी जीवन को लेकर भी काफी दिलचस्पी दिखाई जाती है और उन्हें “उद्यमी”, “निवेशक” और “परोपकारी” जैसे सकारात्मक शब्दों के साथ पेश किया जाता है। यह अध्ययन पत्र अभी प्रकाशित नहीं हुआ है।
आकर्षण और संदेह
इसका यह मतलब नहीं है कि स्वीडन में संपत्ति अब संवेदनशील विषय नहीं रही है। देश के एक प्रमुख टैबलॉयड में अरबपतियों से जुड़ी खबरों का अध्ययन करते हुए हमने देखा कि उनकी दौलत के प्रदर्शन को लेकर समाज में एक तरह का दोहरा नजरिया है। स्वीडन में “वेल्थ पोर्न” (अत्यधिक संपन्नता और आलीशान जीवनशैली का भव्य प्रदर्शन) को लेकर खबरें अक्सर दो रुख के साथ प्रकाशित की जाती हैं।
एक ओर उनमें अरबपतियों की संपत्ति और जीवनशैली को आकर्षक बनाकर पेश किया जाता है, तो दूसरी ओर उसी पर सवाल भी उठाए जाते हैं।
इन खबरों में ड्रोन से खींची गई तस्वीरों और आलीशान हवेलियों के विस्तृत वर्णन के जरिए पाठकों की दिलचस्पी जगाई जाती है। लेकिन साथ ही बार-बार यह भी बताया जाता है कि अरबपति अपनी दौलत का प्रदर्शन करने या उसके बारे में खुलकर बात करने से कितना बचते हैं।
इससे संपत्ति का प्रदर्शन एक ऐसा विषय बन जाता है, जो सामाजिक रूप से संवेदनशील होने के साथ-साथ कभी-कभी अरबपतियों की निजी सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। पाठकों को अरबपतियों की जिंदगी की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया जाता है और ‘जांतेलागेन’ की उस सामाजिक मर्यादा को तोड़ना इस कल्पना को और भी आकर्षक बना देता है।
इस तरह की खबरें अब भी खुले तौर पर धन-दौलत दिखाने और दिखावे वाली जीवनशैली से जुड़े नैतिक सवालों पर केंद्रित रहती हैं।
हालांकि स्वीडन लंबे समय से सामाजिक लोकतंत्र के आदर्श के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अरबपति अपनी संपत्ति किस तरह अर्जित करते हैं और ऐसी दौलत से उन्हें कितना राजनीतिक प्रभाव हासिल हो सकता है—इन सवालों पर बड़े पैमाने पर चर्चा नहीं हुई है।
अरबपतियों को लेकर स्वीडन के लोगों के इस दोहरे रवैये की झलक हमारे हालिया सर्वेक्षण में भी मिली। इसमें देश की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को शामिल किया गया था और उनसे धन तथा संपत्ति को लेकर उनकी सोच के बारे में कई सवाल पूछे गए। इससे पता चला कि बड़ी संख्या में लोग धन को अपनी जिंदगी में प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं।
इन लोगों ने “बहुत सारा धन होना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक है” जैसे बयानों का समर्थन किया। इससे पता चलता है कि अमीर बनने की कोशिश को लेकर स्वीडन के समाज में कोई स्पष्ट सामाजिक वर्जना नहीं है।
लोगों ने यह भी माना कि सामाजिक स्तर पर धन मायने रखता है। उन्होंने बड़े पैमाने पर “धन हैसियत और सम्मान दिलाता है” जैसे बयानों का समर्थन किया। इससे संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत संपत्ति को छिपाकर रखना शायद अब उतना महत्वपूर्ण नहीं रह गया है।
वास्तव में, दौलत का प्रदर्शन सामाजिक फायदे भी दिला सकता है। इससे किसी व्यक्ति को सफल उद्यमी और दूसरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। हमने लोगों से यह भी पूछा कि क्या संपत्ति की अधिकतम सीमा तय की जानी चाहिए, लेकिन “पैसा कभी बहुत ज्यादा नहीं हो सकता” जैसे बयानों को भी मजबूत समर्थन मिला।
हालांकि इससे पता चलता है कि स्वीडन के लोग संपत्ति को महत्व देते हैं, फिर भी ज्यादा अमीर लोगों के साथ उनका जुड़ाव पूरी तरह साफ नहीं है। जब अमीर लोगों को “दूसरों के लिए अच्छे आदर्श” के रूप में पेश किया गया, तो लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया।
स्वीडन में अमीर बनने की कोशिश अब शायद सामाजिक रूप से पहले से अधिक स्वीकार्य हो गई है। संभव है कि हमेशा से ऐसा ही रहा हो, लेकिन स्वीडन के लोग इसके बारे में पहले कभी खुलकर बात नहीं करते थे (कम से कम सार्वजनिक रूप से तो नहीं)। इसके बावजूद, वास्तव में बेहद अमीर होना अब भी विवाद का विषय है।
अगर ‘जांतेलागेन’ का स्वीडन के समाज पर अब भी कोई प्रभाव है, तो लगता है कि वह लोगों को धन कमाने से रोकने वाली ताकत के बजाय अमीर लोगों के प्रति समाज के नजरिए को प्रभावित करने तक सीमित हो गया है।
द कन्वरसेशन खारी माधव
माधव