कोरोर (पलाऊ), एक सितंबर (एपी) प्रशांत क्षेत्र से जुड़े नेताओं के शिखर सम्मेलन के एक रस्मी कार्यक्रम में चीन ने ताइवान के प्रतिनिधियों के शामिल होने के बाद उसे ‘‘नतीजे’’ भुगतने की चेतावनी दी है। इस सम्मेलन में बीजिंग के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
‘पैसिफिक आइलैंड फोरम’ के 18 सदस्य देशों और क्षेत्रों में चीन, अमेरिका या ताइवान शामिल नहीं हैं। इस फ़ोरम का वार्षिक सम्मेलन सोमवार को पलाऊ के सबसे बड़े शहर कोरोर में शुरू हुआ।
अमेरिका से करीबी संबंध रखने वाला मेजबान देश उन कुछ देशों में शामिल है, जो ताइवान को मान्यता देते हैं।
प्रशांत क्षेत्र के कई नेता इस साल के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। हालांकि, कुछ लोगों की अनुपस्थिति खराब स्वास्थ्य या घरेलू राजनीति के कारण थी और इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन विश्लेषकों का अनुमान है कि अन्य लोग बीजिंग के दबाव के कारण अनुपस्थित हो सकते हैं।
शिखर सम्मेलन से पहले, पलाऊ के राष्ट्रपति सुरेंजेल व्हिप्स जूनियर ने ताइवान के प्रतिनिधि और विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किए। उद्घाटन समारोह में बीजिंग और ताइपे के प्रतिनिधियों को एक ही कतार में बैठाया गया, हालांकि वे अलग-अलग खंड में बैठे थे।
इस कार्यक्रम के बाद, चीन के प्रतिनिधि और प्रशांत मामलों के दूत कियान बो ने कोरोर में पत्रकारों से कहा कि ताइवान के अधिकारियों की मौजूदगी ‘‘बहुत अनुचित’’ थी।
यह पूछे जाने पर कि क्या ताइवान को इसके नतीजे भुगतने होंगे, कियान ने कहा कि ‘‘नतीजे तो हमेशा होते ही हैं।’’
उन्होंने अपने बयान को धमकी मानने से इनकार किया तथा इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा। बीजिंग लंबे समय से कूटनीतिक दबाव के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से ताइवान को बाहर रखने की कोशिश करता रहा है।
लिन ने मंगलवार को इस बात को खारिज किया कि उनकी भागीदारी गैर-कानूनी है। उन्होंने बीजिंग पर क्षेत्र को बांटने और ‘‘समस्याओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराने’’ का आरोप लगाया।
कोरोर में लिन ने कहा, ‘‘अगर हम किसी पार्टी में जाते हैं, तो हम हमेशा मेजबान के निर्देशों का पालन करते हैं। हालांकि, जब भी चीन किसी पार्टी में जाता है, तो वह ऐसा व्यवहार करता है जैसे वही मेज़बान हो और पार्टी का पूरा माहौल खराब कर देता है।’’
चीन की टिप्पणी एक ऐसे कार्यक्रम के अंत में आई, जिसमें पलाऊ के राष्ट्रपति ने फोरम में मौजूद बड़ी शक्तियों से आग्रह किया कि वे शिखर सम्मेलन के कामकाज को सदस्य देशों पर ही छोड़ दें।
उन्होंने अपने भाषण में कहा, ‘‘हमारे सहयोगी हमारे साथ यात्रा कर सकते हैं, लेकिन वे हमारी मंज़िल तय न करें। प्रशांत क्षेत्र का एजेंडा हमारे द्वारा और हमारे लिए ही चलाया जाना चाहिए।’’
एपी नेत्रपाल मनीषा
मनीषा