नौवहन अधिकारों पर दबाव या धमकी स्वीकार्य नहीं: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत

नौवहन अधिकारों पर दबाव या धमकी स्वीकार्य नहीं: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत

नौवहन अधिकारों पर दबाव या धमकी स्वीकार्य नहीं: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत
Modified Date: September 18, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: September 18, 2026 7:39 pm IST

संयुक्त राष्ट्र, 18 सितंबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक बैठक में भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नौवहन के अधिकारों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी, अवैध प्रतिबंधों या मनमाने हस्तक्षेप के अधीन नहीं किया जाना चाहिए।

भारत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि समुद्री असुरक्षा के परिणाम तात्कालिक जोखिमों से कहीं अधिक व्यापक होते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘ महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्गों में हालिया बाधाओं ने एक मौलिक सत्य को रेखांकित किया है और वह यह है कि अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और वैश्विक समृद्धि के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। इसका असर पूरी दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ता है, विशेष रूप से ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में।’’

बृहस्पतिवार को यहां आयोजित ‘सुरक्षित समुद्र, साझा सुरक्षा: बदलते सुरक्षा माहौल में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा’ विषय पर सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि नौवहन के अधिकारों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी, अवैध प्रतिबंधों या मनमाने हस्तक्षेप के अधीन नहीं किया जाना चाहिए

उन्होंने कहा, ‘‘ संघर्ष क्षेत्रों में फंसे नाविकों के लिए एक समन्वित सुरक्षित निकासी ढांचा उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय हों।’’

ईरान के विरुद्ध जारी अमेरिकी-इजराइल संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में उत्पन्न बाधाओं के बीच भारत ने कहा कि हाल के अनुभव यह दर्शाते हैं कि समुद्री असुरक्षा का असर केवल तात्कालिक खतरों तक सीमित नहीं रहता।

भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘किसी एक मुख्य जलमार्ग पर रुकावट आने से वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ जाता है, माल ढुलाई और बीमा की लागत में वृद्धि होती है, ऊर्जा तथा खाद्य आपूर्ति बाधित होती है और इसका प्रतिकूल प्रभाव विकासशील देशों पर पड़ता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे व्यावहारिक उपाय तैयार करने चाहिए जो संकट के समय भी आवश्यक व्यावसायिक और मानवीय वस्तुओं की निरंतर आवाजाही को सुगम बना सकें।’’

भारत ने एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन किया।

वर्तमान संघर्ष में नाविकों पर हो रहे सीधे हमलों और भारत द्वारा अपने कुछ समुद्री कर्मचारियों को खोने की पृष्ठभूमि में, पर्वतनेनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों के केंद्र में नाविकों को रखने का आह्वान किया।

पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘ उनकी सुरक्षा, समय पर निकासी, चिकित्सा सहायता, दल में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आपातकालीन योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थितियों में उनकी रक्षा और सुरक्षा पर बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।’’

भाषा शोभना नरेश

नरेश


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