बुनिया (कांगो), 29 सितंबर (एपी) कांगो में इबोला वायरस के संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या 8,000 के पार पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि घातक बीमारी पर काबू पाने के लिए देश में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है।
कांगो ने 15 मई को इबोला प्रकोप की घोषणा की थी। यह प्रकोप दुर्लभ ‘बुंडिबुग्यो वायरस’ के कारण फैला है, जिसका अभी तक कोई ज्ञात इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है और देश को इसे नियंत्रित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह देश में इबोला का 17वां और सबसे घातक प्रकोप है।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की रविवार को जारी ताजा जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर तक देश के 26 में से सात प्रांतों के 63 स्वास्थ्य क्षेत्रों में इबोला के 8,067 मामलों की पुष्टि हुई है और 3,901 लोगों की मौत हुई है। इस बीमारी से मृत्यु दर 48 प्रतिशत से अधिक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा, ‘‘लगातार उच्च मृत्यु दर और विशेष रूप से समुदायों में हो रही मौतों की लगातार उच्च दर बीमारी की गंभीरता तथा समय पर मामलों की पहचान और शुरुआती एवं उचित उपचार तक पहुंच की चुनौतियों को दर्शाती है।’’
इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों की मौत हो रही है। हालांकि इसमें इलाज लेने में देरी या छिपे हुए मामलों जैसे कारकों को शामिल नहीं किया गया है।
कांगो के सत्तारूढ़ दल यूडीपीएस के अधिकारी मैरी-सेलेस्टिन कारोंडवा पर रविवार को अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया। वह रेडियो कार्यक्रम में सरकार के इबोला नियंत्रण उपायों का बचाव कर रहे थे। दल के अनुसार, उनकी हालत गंभीर है।
कारोंडवा उत्तर किवु प्रांत के बुटेम्बो में पार्टी के संघीय कार्यकारी प्रमुख के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। यह क्षेत्र इबोला प्रकोप से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल है।
इबोला के तेजी से फैलने में शुरुआत से ही स्थानीय लोगों में बीमारी को लेकर फैला अविश्वास भी एक कारण रहा है। कई लोगों ने बीमारी को फर्जी बताकर खारिज कर दिया और कई मौकों पर स्वास्थ्यकर्मियों तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले भी किए।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने सोमवार को कहा कि प्रभावित इलाकों में इबोला से निपटने के लिए संसाधन लगाए जाने के कारण अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।
ओसीएचए की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले इतुरी प्रांत में अप्रैल से जून के बीच नियमित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में 13 प्रतिशत की कमी आई।
पिछले सप्ताह डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि कांगो में बीमारी को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो रही है। स्वास्थ्यकर्मियों ने भुगतान में देरी या भुगतान नहीं मिलने की शिकायत की है, जिसके कारण कई बार हड़ताल भी हुई है।
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के अनुसार, प्रकोप की घोषणा के बाद से अब तक 50 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है।
कुछ इलाकों में सुधार के संकेत भी मिले हैं। इतुरी और हॉट-यूले प्रांतों समेत कुछ क्षेत्रों में पिछले कुछ हफ्तों में पुष्ट मामलों की संख्या में कमी आई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कुछ अन्य इलाकों में बीमारी का प्रसार जारी है और इसका भौगोलिक दायरा बढ़ रहा है।
एपी मनीषा वैभव
वैभव