नेपाल में बाढ़ से जान गवांने वालों की संख्या 1,385 हुई

नेपाल में बाढ़ से जान गवांने वालों की संख्या 1,385 हुई

नेपाल में बाढ़ से जान गवांने वालों की संख्या 1,385 हुई
Modified Date: September 11, 2026 / 01:59 pm IST
Published Date: September 11, 2026 1:59 pm IST

(शिरीष बी. प्रधान)

काठमांडू, 10 सितंबर (भाषा) नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,385 हो गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रभावित जिलों से और शव बरामद किए गए हैं, जबकि 5,000 से अधिक लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण अचानक आयी बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, चितवन जिले से कम से कम 364 शव, पूर्वी नवलपरासी से 228, पश्चिमी नवलपरासी से 222 और नुवाकोट से 199 शव बरामद किए गए हैं।

इसी तरह, रसुवा से 185, गोरखा से 77, धाडिंग से 70 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, बाढ़ के दो पीड़ितों की काठमांडू में इलाज के दौरान मौत हो गई।

सुरक्षा कर्मियों की संयुक्त कमांड ने लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी रखा है। लापता लोगों की अनुमानित संख्या 5,130 है।

अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 13,676 लोगों को बचाया जा चुका है।

‘राइजिंग नेपाल’ अखबार की खबर के अनुसार, बाढ़ के बाद चीन में फंसे कम से कम 703 नेपाली नागरिक सिंधुपलचोक के तातोपानी सीमा चौकी के रास्ते अपने देश लौट आए हैं।

ये सभी लोग विनाशकारी बाढ़ से पहले काम के सिलसिले में चीन में रह रहे थे। आपदा के कारण केरुंग और रसुवा जिलों में भारी जान-माल के नुकसान के बाद वे केरुंग और तातोपानी सीमा मार्गों से अपने घर लौट आए।

जिला प्रशासन कार्यालय, सिंधुपलचोक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्वदेश लौटने वाले 703 लोगों में 205 महिलाएं और 498 पुरुष शामिल हैं।

हिमस्खलन के बाद हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ के पानी को अपने साथ नीचे ले आई जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा


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