(एंड्रयू डौडी, मेलबर्न यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 16 जनवरी (द कन्वरसेशन) सदियों से आसमानी बिजली लोगों का ध्यान खींचती रही है। यह (आसमानी बिजली) मिथक, धर्म और लोकप्रिय संस्कृति में बसी हुई है।
नॉर्स मिथक में थोर और हिंदू धर्म में इंद्र की बात करें, या ऑस्ट्रेलिया में फर्स्ट नेशन्स की चट्टानी कला में दिखाई गई सृजन संबंधी पुरातन कथाओं को देखें, आसमानी बिजली का जिक्र जरूर मिलता है।
बिजली के कई प्रकार हैं और यह समाज और पर्यावरण दोनों पर अलग-अलग तरह से असर डालती है।
बिजली क्या है?
बिजली तब उत्पन्न होती है जब बादलों में विद्युत आवेश का निर्माण होता है। यह कुछ हद तक वैसा ही है जैसे जब आप अपने बालों को कंघी करते हैं या ट्रैम्पोलिन पर कूदते हैं तो बाल खड़े हो जाते हैं, लेकिन बादलों में विद्युत आवेश के निर्माण की प्रक्रिया बहुत अधिक तीव्र होती है।
बादलों में यह आवेश तब बनता है जब ठोस और तरल जलकण आपस में टकराते हैं, जो गर्म हवा ऊपर उठने और ठंडी हवा नीचे गिरने (संवहन) के कारण होता है। जब आवेश अत्यधिक बढ़ जाता है, तो बिजली हवा के माध्यम से प्रवाहित होती है, जिसे हम चमक के रूप में देखते हैं।
हम बिजली की चमक तुरंत देख लेते हैं, लेकिन गरज की आवाज बाद में आती है। आवाज़ को एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग तीन सेकंड लगते हैं। चमक और गरज के बीच का समय देखकर बिजली की दूरी का अनुमान लगाया जा सकता है।
वैसे, बिजली सिर्फ पृथ्वी पर ही नहीं पाई जाती; वैज्ञानिकों ने हाल ही में मंगल ग्रह पर भी इसे देखा है।
बिजली के मुख्य प्रकार
बिजली के दो मुख्य प्रकार हैं।
(1) इंट्रा-क्लाउड (बादल के भीतर) – यह बिजली बादल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाती है, लेकिन जमीन तक नहीं पहुँचती। इसे देखने पर बादल झिलमिलाता हुआ दिखाई देता है।
(2) क्लाउड-टू-ग्राउंड (बादल से जमीन तक) – यह तब होता है जब बादल और जमीन के बीच विद्युत आवेश का अंतर बहुत अधिक होता है। यह मानव सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती है और हर साल कई मौतों का कारण बनती है। इसे हम कहते हैं कि बिजली गिर गई।
दुर्लभ प्रकार की बिजली
सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन बिजली के दुर्लभ प्रकार भी होते हैं।
(1) पायरोजेनिक बिजली – यह कभी-कभी बड़े जंगल की आग के दौरान धुएं में उत्पन्न होती है और नई आग जला सकती है।
(2) ऊपरी वायुमंडलीय चमक वाले दृश्य (ट्रांजिएंट ल्यूमिनस इवेंट्स) – इनमें स्प्राइट्स, ब्लू जेट्स, ईएलवीईएस और पीआईएक्सआईईएस शामिल हैं। स्प्राइट्स लाल झील जैसी दिखती हैं, ब्लू जेट्स नीली किरणें हैं जो ऊपर की ओर जाती हैं, ईएलवीईएस लाल पुंज के रूप में दिखते हैं और पीआईएक्सआईईएस बिजली के नीले रंग की चमक के छोटे फ्लैश हैं।
(3) बॉल लाइटनिंग – कई लोगों ने इसे देखने का दावा किया है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।
गर्म होती दुनिया में बिजली:
गर्म हवा अधिक जलवाष्प रख सकती है, जिससे अधिक तीव्र तूफान और बिजली आ सकती है। यदि भविष्य में आसमानी बिजली कड़कने की आवृत्ति बढ़ती है, तो यह वातावरण में ओज़ोन पैदा कर सकती है, जो गर्मी और वायु प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देती है। हालांकि, बिजली ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण नहीं है।
अगली बार जब आप तूफान में बिजली का करिश्मा देख रहे हों, तो सोचें कि यह कितने अलग रूप ले सकती है। यह न केवल हमारे ग्रह का चमत्कार है, बल्कि अन्य ग्रहों पर भी इसकी मौजूदगी है – और इसे सुरक्षित दूरी से देखना ही सबसे अच्छा है।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा पवनेश
पवनेश