अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले इराकी शहर पर ड्रोन हमला, अमेरिका-ईरान में टकराव बढ़ा

अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले इराकी शहर पर ड्रोन हमला, अमेरिका-ईरान में टकराव बढ़ा

अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले इराकी शहर पर ड्रोन हमला, अमेरिका-ईरान में टकराव बढ़ा
Modified Date: July 24, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: July 24, 2026 9:11 pm IST

इरबिल (इराक), 24 जुलाई (एपी) अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले एक उत्तरी इराकी शहर को शुक्रवार को विस्फोटकों से लदे ड्रोन से निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन में सायरन बजने की सूचना है। ये घटनाएं अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुईं।

पिछले हफ्ते तनाव फिर से बढ़ गया। अमेरिका ने ईरान पर हमले किए, जबकि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले किए और इलाके में अमेरिक की संपत्तियों और उसके सहयोगियों को निशाना बनाया।

यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है और ताजा लड़ाई का केंद्र भी यही है। ईरानी हमलों से यह जलमार्ग बंद हो सकता है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और भारी आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है।

इस हफ्ते ईरान के सहयोगी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो टैंकरों को निशाना बनाकर दबाव और बढ़ा दिया है। उन्होंने इलाके से तेल ले जाने वाले एक वैकल्पिक रास्ते को बंद करने की अपनी धमकी को सच कर दिखाया है।

युद्ध से ईरान और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हुए भारी नुकसान के बावजूद लड़ाई के इस नए दौर का कोई साफ समाधान नहीं दिख रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हाल के हफ्तों में हुए हमलों में 55 लोग मारे गए हैं और अन्य 600 से अधिक घायल हुए हैं।

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया और युद्ध के लिए अलग-अलग मकसद बताए, जिनमें तेहरान की सरकार को गिराना और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना शामिल है, लेकिन यह टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की लड़ाई में बदल गया है।

ईरान को उम्मीद है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर रियायतें हासिल कर लेगा, जबकि अमेरिका उस नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने ईरान भर में कई जगहों पर हमले किए हैं, तो ईरान ने क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया है।

उत्तरी इराक के सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह इरबिल के ऊपर अमेरिकी सेना ने विस्फोटकों से लदे पांच ड्रोन को रोका और मार गिराया। उन्होंने कहा, ‘‘अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही कोई नुकसान हुआ।’’

‘एपी’ के एक पत्रकार ने शहर में कम से कम सात धमाकों की आवाज सुनी। यह शहर इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र की राजधानी है। पत्रकार ने शहर के हवाई अड्डे पर मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे के पास या उसके अंदर से काले धुएं के कम से कम चार गुबार उठते देखे। इराक की सरकारी समाचार एजेंसी ने हवाई अड्डे के निदेशक के हवाले से बताया कि हवाई अड्डे पर उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहीं।

इराक में तैनात अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इस बारे में पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया।

हाल के सालों में अमेरिका ने इराक में प्रशिक्षण और इराकी सेना के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के लिए करीब 2,500 सैनिक तैनात किए थे। इनमें से कई सैनिक वापस बुला लिये गए हैं, लेकिन सैन्य सलाहकारों और दूसरे लोगों की एक छोटी टुकड़ी अब भी वहां मौजूद है, जिनमें से कई लोग इरबिल चले गए हैं।

सरकारी टीवी पर प्रसारित एक बयान के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पड़ोसी देशों के लोगों से कहा है कि वे अमेरिकी सैनिकों वाले सैन्य अड्डों से दूर रहें और साथ ही उन जगहों की जानकारी दें जहां ये सैनिक तैनात हैं।

अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी किए जाने के बाद तेहरान ने इलाके के उन कई देशों को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। बहरीन ने कहा कि उसने शुक्रवार को ईरान के हवाई हमलों को रोका और उन्हें मार गिराया। उसने यह नहीं बताया कि कोई हताहत हुआ या कोई नुकसान पहुंचा या नहीं।

शुक्रवार सुबह अर्ध-सरकारी मीडिया प्रतिष्ठान ‘फार्स’ और ‘आईएसएनए’ ने खबर दी कि रातभर जारी अमेरिकी हमलों में ईरान के उत्तर में अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के एक नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया गया।

रात भर हुई अमेरिकी बमबारी में ईरान के केश्म द्वीप पर भी धमाकों की खबरें मिली हैं। यह द्वीप ईरान के नौसैनिक साजो-सामान (जैसे ड्रोन बोट) का अड्डा है, जिनका इस्तेमाल ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला करने के लिए कर सकता है। इसके अलावा, इस्फहान प्रांत में भी धमाके हुए जहां ईरान का एक बड़ा वायुसैनिक अड्डा और एक परमाणु संयंत्र स्थित है।

ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत और दक्षिणी फार्स प्रांत में भी हमले की सूचना है।

‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने कहा कि नए हमले स्थानीय समयानुसार सुबह करीब पांच बजे से पहले समाप्त हो गए। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ‘‘क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले असैन्य नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना था।’’ अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है।

हूती विद्रोहियों ने युद्ध में नया मोर्चा खोल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बंद करने और ऐसा करके पश्चिम एशिया से कहीं आगे आर्थिक उथल-पुथल मचाने की ईरान की क्षमता उसे किसी भी बातचीत में बहुत अधिक बढ़त प्रदान करती है। उसके हूती सहयोगियों ने इस बढ़त को और बढ़ा दिया, जब उन्होंने बृहस्पतिवार को लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इससे पश्चिम एशिया के एक अहम तेल निर्यात मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लेकर जोखिम बढ़ गया।

इन हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई, हालांकि बाद में इसमें गिरावट आई।

इन हमलों ने सऊदी अरब से संबंधित जहाजों के लिए बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की हूतियों की धमकी को सच कर दिखाया। अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, और दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार (जिसमें वैश्विक कंटेनर यातायात का एक चौथाई हिस्सा शामिल है) यहीं से होकर गुजरता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हूती विद्रोहियों ने जहाजों पर हमले जारी रखे तो उन्हें ‘‘बड़े सैन्य दंड’’ का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘यदि वे दोबारा ऐसा करते हैं तो अमेरिका इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा, क्योंकि हूती ईरान के समर्थित समूह हैं। ऐसी स्थिति में ईरान और निश्चित रूप से स्वयं हूतियों को भी कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’’

ट्रंप ने ईरान को उसके हमले के लिए चेतावनी देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका के कब्जे में मौजूद ईरान की प्रतिबंधित निधियों का इस्तेमाल युद्ध में क्षतिग्रस्त हुई नौकाओं की मरम्मत का खर्च उठाने के लिए किया जाएगा।

यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप इन निधियों तक पहुंचने और उन्हें खर्च करने के लिए किन कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेंगे।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सुझाव की निंदा करते हुए लिखा कि ‘‘एक बार जब सरकारें संपत्ति जब्त करने को सामान्य बना देती हैं, तो किसी की भी संपत्ति सुरक्षित नहीं रहती। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली अराजकता न तो सुखद होगी और न ही शांतिपूर्ण।’’

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगभग 400 जहाजों पर कम से कम 6,000 नाविक फंसे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने शुक्रवार को नाविकों की मदद के लिए ‘तत्काल कार्रवाई’ किये जाने की अपील की।

ईरान का कहना है कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात को प्रबंधित करने और संभवतः शुल्क वसूलने का अधिकार है, लेकिन युद्ध से पहले यह रास्ता सभी के लिए शुल्क मुक्त था।

एपी संतोष सुरेश

सुरेश


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