जयशंकर ने विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की
जयशंकर ने विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की
(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, 22 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर यहां विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे।
जयशंकर ने सोमवार को अपनी बैठकों की शुरुआत फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो के साथ मुलाकात से की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमारी नियमित बैठकों और फोन पर होने वाली बातचीत से हमें अपनी विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की गति बनाए रखने में मदद मिलती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, विशेष रूप से यूक्रेन एवं खाड़ी संकट पर चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार समेत बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।’’
जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से भी न्यूयॉर्क में मुलाकात की। इससे कुछ सप्ताह पहले भी उन्होंने इस महीने की शुरुआत में यूक्रेन की अपनी यात्रा के दौरान सिबिहा से मुलाकात की थी।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूक्रेन की अपनी हाल की यात्रा के बाद विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से फिर मिलने का अवसर मिला। हमारी बातचीत पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम पर केंद्रित रही।’’
बैठक के बाद सिबिहा ने कहा कि जयशंकर के साथ शांति प्रयासों, द्विपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा कर उन्हें प्रसन्नता हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने काला सागर की स्थिति और बाजार पर उसके प्रभावों के बारे में बात की। वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना बेहद महत्वपूर्ण है। यूक्रेन रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है और हम भारत की भागीदारी को महत्व देते हैं।’’
सिबिहा ने कहा, ‘‘हमने निकट भविष्य में अपने द्विपक्षीय अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा की। इसमें नवोन्मेष पर जोर के साथ कारोबार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पक्ष भी शामिल होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन विज्ञान, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि और अन्य क्षेत्रों में भारत के साथ सक्रिय साझेदारी विकसित करने का इच्छुक है।’’
जयशंकर ने मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पॉपसोई के साथ भी मुलाकात की और दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक तथा शैक्षणिक संबंधों में हुई प्रगति का उल्लेख किया। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के साथ बैठक के दौरान जयशंकर ने भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद मजबूत होते आर्थिक संबंधों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने इक्वाडोर के विदेश मंत्री रॉबर्टो कुरी के साथ बैठक के बाद कहा, ‘‘हमने ऊर्जा और औषधि क्षेत्र समेत आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, लोगों की आवाजाही, कर्मियों के प्रशिक्षण, विकास साझेदारी तथा संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के बारे में चर्चा की।’’
स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार के साथ मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के अलावा दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।
जयशंकर ने हंगरी की उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अनीता ओरबान के साथ भी अपनी पहली मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को ‘‘बेहतरीन’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपने संबंधों को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।’’
जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में विश्व के नेताओं को 26 सितंबर को संबोधित करेंगे।
बाद में जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा के साथ पहले ‘बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि के लिए साझेदार’ (पी4एम) शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी की।
ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या के सह-प्रायोजन में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को बनाए रखने के लिए आज बहुपक्षवाद बेहद जरूरी है।
उन्होंने जारी संघर्षों के विशिष्ट पहलुओं से निपटने, उभरती क्षमताओं के लिए ढांचे और जरूरी सुरक्षा उपाय तैयार करने, वर्चस्व एवं व्यवधान से निपटने के लिए विविधता लाने एवं जोखिम कम करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों के महत्व पर जोर दिया।
भाषा
सिम्मी मनीषा
मनीषा

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