कांगो और युगांडा में इबोला मामलों में एक सप्ताह में 40 फीसदी की बढ़ोतरी, मृतक संख्या 200 पार
कांगो और युगांडा में इबोला मामलों में एक सप्ताह में 40 फीसदी की बढ़ोतरी, मृतक संख्या 200 पार
डकार, 19 जून (एपी) कांगो और युगांडा में इबोला प्रकोप के कारण मरने वालों की संख्या 200 से अधिक हो गई है, जबकि संक्रमण के मामले एक सप्ताह में लगभग 38 प्रतिशत बढ़ गए हैं। ‘अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (अफ्रीका सीडीसी) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकोप में अब तक 894 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और यह प्रारंभिक चरण में ही अब तक का सबसे गंभीर प्रकोप माना जा रहा है। अनुमान है कि करीब 35,000 संभावित संपर्कों का पता लगाया जाना है।
अफ्रीका सीडीसी के चिकित्सा महामारी विशेषज्ञ डॉ. वेस्सम मैनकौला ने बताया कि यह प्रकोप युगांडा में वर्ष 2000 के प्रकोप की तुलना में तीन गुना अधिक गंभीर है, जिसमें इसी चरण में 281 मामले दर्ज किए गए थे।
उन्होंने कहा कि मामलों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि प्रकोप की पुष्टि 15 मई को हुई थी, जबकि हफ्तों पहले इसके शुरू होने की आशंका थी। वर्तमान में यह संक्रमण कांगो के पूर्वी हिस्से के 32 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है।
यह प्रकोप दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो वायरस’ के कारण हुआ है, जिसके लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। शुरुआती दिनों में इसकी पहचान भी नहीं हो पाई थी।
कांगो में 16 प्रकोपों में अधिकतर मामले अधिक सामान्य ‘ज़ैरे वायरस’ से जुड़े थे, जिसके लिए टीका उपलब्ध है।
अब तक पूर्वी कांगो और युगांडा में 74 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। शोधकर्ता मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे प्रायोगिक उपचारों पर काम कर रहे हैं।
इबोला वायरस के संक्रमण अधिकतर मामले कांगो के इटुरी प्रांत में केंद्रित हैं, जहां 90 प्रतिशत से अधिक संक्रमण दर्ज किए गए हैं। उत्तर किवु और दक्षिण किवु प्रांतों में भी मामले सामने आए हैं, जबकि युगांडा में संक्रमण सीमा पार फैल चुका है, जहां 19 मामलों की पुष्टि और दो मौतें हुई हैं।
डॉ. मैनकौला ने बताया कि क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों और सुरक्षा स्थिति के कारण संपर्कों का पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘800 से अधिक पुष्ट मामलों के लिए हमें 17,000 से 35,000 संपर्कों की सूची होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान में केवल लगभग 4,000 लोगों का ही पता लगाया जा सका है।’’
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इटुरी प्रांत में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण करीब दस लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे निगरानी और संपर्क का पता लगाने का काम और कठिन हो गया है।
विशेषज्ञों ने बताया कि खनिज समृद्ध क्षेत्र में सक्रिय हजारों खनिकों की लगातार आवाजाही भी संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रही है।
अधिकारियों के अनुसार, महामारी से निपटने के लिए 90 करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता की घोषणा की गई है, लेकिन अब तक केवल नौ करोड़ डॉलर ही जारी किए गए हैं।
अफ्रीका सीडीसी ने कहा है कि उसे 540 कर्मियों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 84 ही तैनात हैं।
अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से वित्तीय सहायता शीघ्र जारी करने की अपील की है ताकि प्रकोप पर नियंत्रण पाया जा सके।
एपी मनीषा शोभना
शोभना

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