अल नीनो के प्रभाव से श्रीलंका में पेयजल संकट, 1.15 लाख से अधिक लोग प्रभावित

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अल नीनो के प्रभाव से श्रीलंका में पेयजल संकट, 1.15 लाख से अधिक लोग प्रभावित

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 04:30 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 04:30 PM IST

कोलंबो, आठ सितंबर (भाषा) श्रीलंका में उभरती अल नीनो स्थिति, बढ़ते तापमान और कम बारिश के कारण देश के कुछ हिस्सों में शुष्क मौसम की स्थिति गंभीर होने से 1.15 लाख से अधिक लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मौसम विभाग के महानिदेशक अजित विजेमन्ना ने कहा कि अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है और हो सकता है कि यह मौजूदा मौसम संबंधी परिस्थितियों को प्रभावित कर रही हो।

अल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी के समय-समय पर गर्म होने की स्थिति है, जो क्षेत्र में तापमान को प्रभावित कर सकती है। श्रीलंका में जारी शुष्क मौसम के बीच इसके विकास और संभावित प्रभाव पर करीबी नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर से घिरे श्रीलंका में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।

आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) के अनुसार, देश के 25 प्रशासनिक जिलों में से सात में अल नीनो से जुड़ी मौसम संबंधी स्थिति के कारण 1,15,586 लोग प्रभावित हुए हैं।

डीएमसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भीषण गर्मी और बारिश की कमी से कई इलाके प्रभावित हुए हैं, जिससे पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

डीएमसी के अधिकारी प्रगिथ दनंसूरिया ने कहा कि वर्तमान में 1,15,534 लोग पेयजल की कमी से प्रभावित हैं।

सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में करीब 3,500 एकड़-फुट क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय में पानी का स्तर घटकर करीब 1,000 एकड़-फुट रह गया है।

अधिकारियों के अनुसार, मध्य क्षेत्र के मातले और उत्तर-पूर्व में नंदीकडल समेत कई अन्य इलाकों में भी जल स्तर में कमी आई है।

लंबे समय से जारी शुष्क परिस्थितियों का जलीय जीवों और वन्यजीवों पर भी असर पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मुल्लैतिवु लैगून में हजारों छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इनकी मौत का कारण समुद्री और मीठे पानी के मिश्रण को बताया है।

कई इलाकों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं, जिसके कारण जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में इधर-उधर जाने को मजबूर हैं।

सूखे का असर कृषि पर भी पड़ा है और पानी की कमी के कारण धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी फसलों को नुकसान हो रहा है।

विजेमन्ना ने कहा कि सितंबर के अंत से कुछ बारिश होने की उम्मीद है, जिससे मौजूदा परिस्थितियों से राहत मिलने की संभावना है।

भाषा

मनीषा नरेश

नरेश