लंदन, पांच जनवरी (एपी) किशोरी डायरी लेखिका ऐनी फ्रैंक की सौतेली बहन और यहूदी नरसंहार की भयावहता के बारे में दुनिया को बताने वालीं ईवा श्लॉस का निधन हो गया। वह 96 वर्ष की थीं।
‘ऐनी फ्रैंक ट्रस्ट यूके’ ने बताया कि लंदन में शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। श्लॉस ट्रस्ट की मानद अध्यक्ष थीं। फ्रैंक ने अपनी डायरी में नाजी क्रूरता का वर्णन किया था।
ईवा श्लॉस को ऑशवित्ज यातना शिविर से तब मुक्ति मिली थी, जब सोवियत सैनिकों ने शिविर को मुक्त कराया।
ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय ने कहा कि उन्हें श्लॉस को जानने का सौभाग्य मिला, जिन्होंने युवाओं को पूर्वाग्रहों को चुनौती देने में मदद करने के लिए परमार्थ ट्रस्ट की सह-स्थापना की थी।
महाराजा ने कहा, ‘‘एक युवती के रूप में उन्होंने जिन भयावहता का सामना किया, उन्हें समझना असंभव है, फिर भी उन्होंने अपना शेष जीवन घृणा और पूर्वाग्रह को मिटाने, करुणा, साहस को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कर दिया।’’
ईवा श्लॉस का 1929 में वियना में जन्म हुआ था। शुरुआत में उनका नाम ईवा गेइरिंगर था। नाज़ी जर्मनी द्वारा ऑस्ट्रिया पर कब्ज़ा किए जाने के बाद श्लॉस अपने परिवार के साथ एम्स्टर्डम भाग गईं। उनकी दोस्ती हमउम्र एक अन्य यहूदी लड़की, ऐनी फ्रैंक से हुई, जिनकी डायरी यहूदी नरसंहार के सबसे प्रसिद्ध वृत्तांतों में से एक बन गई।
फ्रैंक परिवार की तरह, ईवा के परिवार ने भी नाजियों द्वारा नीदरलैंड पर कब्जा करने के बाद पकड़े जाने से बचने के लिए दो साल तक छिपकर बिताए। अंततः उनकी भेद खुल गई, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और ऑशवित्ज यातना शिविर में भेज दिया गया।
वर्ष 1945 में सोवियत सैनिकों ने शिविर को मुक्त कराया। श्लॉस और उनकी मां फ्रिट्ज़ी तो बच गईं, लेकिन उनके पिता एरिख और भाई हेंज की ऑशवित्ज में मृत्यु हो गई।
युद्ध के बाद, ईवा ब्रिटेन चली गईं, जर्मन यहूदी शरणार्थी ज़्वी श्लॉस से शादी की और लंदन में बस गईं। 1953 में, उनकी मां ने फ्रैंक के पिता, ओटो से शादी कर ली।
ऐनी फ्रैंक की मृत्यु युद्ध की समाप्ति से कुछ महीने पहले, बर्गन-बेल्सन यातना शिविर में 15 वर्ष की आयु में हो गई थी।
श्लॉस ने दशकों तक सार्वजनिक रूप से अपने अनुभवों के बारे में बात नहीं की। बाद में उन्होंने कहा कि युद्धकालीन आघात ने उन्हें अंतर्मुखी बना दिया और वह दूसरों से जुड़ने में असमर्थ थीं।
हालांकि, 1986 में लंदन में ऐनी फ्रैंक प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में भाषण देने के बाद, श्लॉस ने युवा पीढ़ियों को नाजी क्रूरता और यहूदी नरसंहार के बारे में अवगत करना अपना मिशन बना लिया।
एपी आशीष दिलीप
दिलीप