गेट्स फाउंडेशन ने चेताया, एआई बढ़ा सकता है असमानता; पहुंच बढ़ाने के लिए एक अरब डॉलर देने का ऐलान

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गेट्स फाउंडेशन ने चेताया, एआई बढ़ा सकता है असमानता; पहुंच बढ़ाने के लिए एक अरब डॉलर देने का ऐलान

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 12:05 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 12:05 PM IST

न्यूयॉर्क, 16 सितंबर (एपी) माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने प्रौद्योगिकी कंपनियों और विश्व नेताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सामाजिक असमानताओं को कम करने का माध्यम बने, न कि उन्हें और गहरा करे।

गेट्स फाउंडेशन ने एआई तक पहुंच बढ़ाने के लिए एक अरब डॉलर देने की घोषणा की है। गेट्स ने यह अपील गेट्स फाउंडेशन की वार्षिक ‘गोलकीपर्स’ रिपोर्ट में की। यह रिपोर्ट 2030 तक जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय विकास लक्ष्यों की प्रगति पर नजर रखती है।

मंगलवार को घोषित यह राशि अगले दो वर्षों में एआई से जुड़े विभिन्न प्रयासों पर खर्च की जाएगी। इनमें स्थानीय भाषाओं में मॉडल तैयार करने के लिए उन्हें बेहतर आंकड़ों से प्रशिक्षित करना, स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों में सुधार, शिक्षा संबंधी उपकरणों को उन्नत करना और दुनियाभर के छोटे किसानों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना शामिल है।

अमेरिका द्वारा विदेशी सहायता में कटौती के बावजूद गेट्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क सुजमैन ने कहा कि वह विदेशी सहायता के क्षेत्र में अमेरिका की अगुवाई के लिए कांग्रेस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर दबाव बनाना जारी रखेंगे।

सुजमैन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘‘हमने अमेरिका से उम्मीद नहीं छोड़ी है। हम स्वीकार करते हैं कि इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार के साथ यह चुनौतीपूर्ण दौर रहा है। लेकिन अभी भी इसके पक्ष में तर्क दिया जा सकता है।’’

लंबे समय से तैयार की जा रही यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब प्रमुख एआई कंपनियों के अधिकारी उद्योग जगत से तेजी से हो रहे एआई विकास को धीमा करने का आग्रह कर रहे हैं।

एंथ्रोपिक के एक पूर्व शोधकर्ता के इस चिंता के चलते इस्तीफा देने के बाद कि एआई विकसित करने वाली कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं, यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या लगातार शक्तिशाली होते जा रहे एआई मॉडल मानव नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।

गेट्स ने भी पिछले महीने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में इसी तरह की चिंताएं जताई थीं। उन्होंने लिखा था कि एआई या तो ‘‘सबसे बड़ा समानता लाने वाला माध्यम’’ बनेगा या ‘‘अन्याय का सबसे खराब स्रोत’’ साबित होगा।

उन्होंने यह भी माना था कि यह तकनीक लोगों को धोखाधड़ी, गलत सूचना फैलाने, निगरानी, साइबर हमलों और जैव आतंकवाद को अंजाम देने में सक्षम बना सकती है।

दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य वित्तपोषकों में शामिल गेट्स फाउंडेशन का जोर सुरक्षा उपायों के लिए धन देने की तुलना में एआई के उन लाभों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर अधिक है, जिन्हें गेट्स महत्वपूर्ण मानते हैं।

एआई इस साल फाउंडेशन के रिकॉर्ड बजट से लाभान्वित होने वाले कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल है। गेट्स ने पिछले महीने अपने ब्लॉग में कहा था कि ‘‘हमारे सभी काम’’ एआई का ‘‘पूरा लाभ उठाएंगे।’’

उन्होंने सवाल उठाया था, ‘‘हम इस तकनीक का इस्तेमाल दुनिया को अधिक न्यायसंगत बनाने और अमीर तथा गरीब के बीच की खाई को बढ़ने से रोकने के लिए कैसे करेंगे?’’

उन्होंने यह भी पूछा था कि एआई से होने वाले नुकसान के लिहाज से सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा कैसे की जाए, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो अपनी आजीविका और अपने भविष्य पर नियंत्रण की भावना खो सकते हैं।

सुजमैन के अनुसार, गेट्स फाउंडेशन एआई को ‘‘ऐसे विश्व के लिए संभावित रूप से परिवर्तनकारी उपकरण’’ मानता है, जो ‘‘थोड़ा संकट में है।’’

फाउंडेशन ने पिछले साल की रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि 2025 इस सदी का पहला साल होगा, जब बच्चों की मौतों में बढ़ोतरी होगी। ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक एड्स राहत कार्यक्रम में किए गए बदलावों से दर्जनों देशों में इस बीमारी की रोकथाम और इलाज के प्रयास प्रभावित हुए हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अमीर और गरीब देशों के बीच अंतर और बढ़ रहा है।

सुजमैन ने कहा कि यदि एआई को ‘‘प्रगति में तेजी लाने’’ में मदद करनी है तो उसे केवल अंग्रेजी और कुछ हद तक मंदारिन में नहीं, बल्कि सभी स्थानीय भाषाओं में प्रभावी ढंग से काम करना होगा।

फाउंडेशन ने मंगलवार को करीब 10 करोड़ डॉलर की राशि की घोषणा की, जिसका इस्तेमाल वंचित समुदायों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में डेटासेट तैयार करने और उनमें स्थानीय परिस्थितियों को शामिल करने के लिए किया जाएगा।

फाउंडेशन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रमुख एआई कंपनियों की मदद ले रहा है। गूगल डॉट ऑर्ग और माइक्रोसॉफ्ट की ‘एआई फॉर गुड लैब’ ने अफ्रीका की हजारों कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं के लिए जरूरी ढांचे को मजबूत करने वाली परियोजनाओं के वास्ते संयुक्त रूप से वित्तपोषण का आह्वान शुरू किया है।

ओपनएआई ने फाउंडेशन के साथ 5 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका इस्तेमाल रवांडा के क्लीनिकों में स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट परियोजना में किया जाएगा। सुजमैन ने कहा कि जल्द ही इसमें अन्य अफ्रीकी देशों को भी शामिल किया जाएगा।

एंथ्रोपिक फाउंडेशन के साथ मिलकर टीकों के विकास में तेजी लाने और अपने चैटबॉट के स्थानीय फसलों से संबंधित डेटासेट को बेहतर बनाने सहित अन्य प्रयासों पर काम कर रही है।

मंगलवार की घोषणा के अनुसार शिक्षा के लिए करीब 40 करोड़ डॉलर खर्च किए जाएंगे। इसमें ऐसा उपकरण भी शामिल है जो शिक्षकों को उनकी कक्षाओं में सबसे कम समझे जाने वाले विषयों के अनुरूप पाठ योजनाओं में बदलाव करने में मदद करेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए करीब 40 करोड़ डॉलर रखे गए हैं। इसमें ऐसा उपकरण विकसित करना शामिल है जो चिकित्सकों की रिपोर्ट की दोबारा जांच कर उन लक्षणों की पहचान में मदद करेगा, जिन पर ध्यान नहीं गया हो।

कृषि के लिए करीब 10 करोड़ डॉलर खर्च किए जाएंगे। इसके तहत किसानों को मौसम के रुझान, कीट नियंत्रण और उर्वरक के इस्तेमाल पर वास्तविक समय में सलाह देने वाला ऐप विकसित किया जाएगा।

एपी

मनीषा वैभव

वैभव