लाल सागर में हूती के हमलों के बीच सऊदी अरब के शहजादे ने मिस्र से मांगा समर्थन

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लाल सागर में हूती के हमलों के बीच सऊदी अरब के शहजादे ने मिस्र से मांगा समर्थन

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 11:51 AM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 11:51 AM IST

काहिरा, 16 सितंबर (एपी) सऊदी अरब के शहजादे ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा देश के जहाजों और तेल बुनियादी ढांचों पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच मंगलवार को मिस्र के राष्ट्रपति से समर्थन मांगा।

इन हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से निपटने को लेकर सऊदी अरब अब तक काफी हद तक अकेला रहा है। हूती विद्रोहियों ने बीते सप्ताह यमन के कई और इलाकों पर कब्जा जमा लिया है, जिससे लाल सागर के जरिए सऊदी अरब के तेल निर्यात को बाधित करने की उसकी क्षमता और मजबूत हुई है।

सऊदी अरब के तेल उत्पादन पर मंडराते खतरे का अंदाजा हाल में हुए उस हमले से भी लगता है, जिसमें उसकी सबसे बड़ी पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था। माना जा रहा है कि यह हमला इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों ने किया था।

क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत कार्य के कारण ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ कई हफ्तों तक बंद रहेगी, जिससे बाजार में प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी।

सऊदी के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की।

शहजादे ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

अल-सिसी के कार्यालय ने भी बयान जारी कर ‘‘सऊदी अरब को समर्थन देने के मिस्र के दृढ़ रुख’’ को रेखांकित किया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने इस बात का विवरण नहीं दिया कि वे हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाएंगे। लेकिन माना जा रहा है कि मिस्र द्वारा सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के आसार कम है, लेकिन अरब जगत में प्रभाव होने के कारण वह राजनीतिक समर्थन जुटाने में मददगार साबित हो सकता है।

मिस्र पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में मध्यस्थता प्रयासों के केंद्र में रहा है और उसने ईरान व उसके सहयोगियों सहित सभी पक्षों से संवाद बनाए रखा है।

हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए लाल सागर स्थित मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में व उसके पास मौजूद तीन रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर लिया है।

इससे हूती विद्रोहियों की स्थिति और मजबूत हुई है और वे जुलाई के अंत से निशाना बनाए जा रहे सऊदी जहाजों के लिए जलडमरूमध्य का रास्ता पूरी तरह बंद कर सकते हैं।

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को खुले समुद्र से जोड़ता है, जहां से सऊदी अरब का तेल, एशिया स्थित उसके सबसे बड़े खरीदारों तक पहुंचता है।

सऊदी अरब अब तक हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने से बचता दिख रहा है। उसे डर है कि ऐसा करने से उसके तेल बुनियादी ढांचों पर हूती हमले और बढ़ सकते हैं, और वह अपने दक्षिणी पड़ोसी देश यमन के साथ दोबारा पूर्ण युद्ध में उलझ सकता है।

लेकिन हूती हमलों के जारी रहने से अब सऊदी अरब के सामने यह मुश्किल फैसला लेने की स्थिति बन गई है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई तेज करे या कूटनीतिक समाधान का रास्ता तलाशे।

एपी

खारी मनीषा

मनीषा