एआई के प्रति ‘जेन जेड’ का विरोध बताता है कि पहले से तय नहीं किया जा सकता भविष्य

एआई के प्रति ‘जेन जेड’ का विरोध बताता है कि पहले से तय नहीं किया जा सकता भविष्य

एआई के प्रति ‘जेन जेड’ का विरोध बताता है कि पहले से तय नहीं किया जा सकता भविष्य
Modified Date: July 17, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: July 17, 2026 5:34 pm IST

(सियोभन लियोन्स, मीडिया एंड कल्चरल स्टडीज, मैक्वेरी यूनिवर्सिटी में स्कॉलर)

लंदन, 17 जुलाई (द कन्वरसेशन) मशहूर फिल्म निर्देशक मार्टिन स्कॉर्सेसी ने हाल ही में घोषणा की कि वह रचनात्मक कृत्रिम बुद्धिमता (जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंपनी ब्लैक फॉरेस्ट लैब्स से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह फिल्मों और टीवी शो की शुरुआती योजना तैयार करने के लिए स्टोरीबोर्डिंग में एआई का इस्तेमाल करेंगे। स्टोरीबोर्डिंग का मतलब है किसी फिल्म या शो के शुरुआती चरण में उसके दृश्यों की रूपरेखा तैयार करना।

इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ। कई लोगों ने कहा कि एआई सिनेमा को बर्बाद कर सकता है।

इससे पहले कई कॉलेजों के दीक्षांत समारोहों में छात्रों ने उन मुख्य अतिथियों का विरोध किया, जिन्होंने जनरेटिव एआई की तारीफ की थी।

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में रियल एस्टेट कारोबारी ग्लोरिया कॉलफील्ड ने कहा कि एआई ‘अगली औद्योगिक क्रांति’ है।

लेकिन पहले से कर्ज और नौकरी की असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे मानविकी विषय के छात्रों ने जोरदार नारेबाजी करके इसका विरोध किया।

गूगल के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट और बिग मशीन रिकॉर्ड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्कॉट बोर्चेटा को भी दीक्षांत समारोहों में एआई की तारीफ करने पर छात्रों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। उनकी हैरानी भरी प्रतिक्रिया बताती है कि एआई को लेकर अलग-अलग पीढ़ियों की सोच में बड़ा अंतर है।

नयी प्रौद्योगिकी को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित कौन है?

अक्सर माना जाता है कि नयी पीढ़ी नयी प्रौद्योगिकी को सबसे जल्दी अपनाती है। लेकिन कई शोध बताते हैं कि ‘जेन जेड’ यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग एआई का विरोध कर रहे हैं।

गैलप के एक हालिया अध्ययन में पता चला कि ‘जेन जेड’ को नहीं लगता कि एआई रचनात्मकता या सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाता है। ज्यादातर युवाओं का मानना है कि इससे खासकर पढ़ाई पर बुरा असर पड़ सकता है।

इसके उलट, 2025 में थॉमसन रॉयटर्स के एक सर्वे में पता चला कि बेबी बूमर पीढ़ी सबसे ज्यादा मानती है कि एआई का कार्यस्थलों पर तेजी से उपयोग किया जाएगा।

बेबी बूमर और एआई

बेबी बूमर वह पीढ़ी है जिसने टाइपराइटर जैसी पुरानी प्रौद्योगिकी से लेकर कंप्यूटर और वर्ड प्रोसेसर जैसी नयी प्रौद्योगिकी तक का बदलाव देखा है। उस समय नौकरी में लंबे समय तक काम करना आम बात थी।

इसी वजह से सर्वे के अनुसार कई बेबी बूमर एआई को एक क्रांतिकारी साधन मानते हैं। उनका मानना है कि एआई समय बचाता है और उन पुरानी प्रौद्योगिकियों की तुलना में ज्यादा आसान है, जिनका वे पहले इस्तेमाल करते थे।

प्रौद्योगिकी के बारे में लिखने वाले जोसाया गोगार्टी का कहना है कि बेबी बूमर एआई से बनने वाले कंटेंट का आनंद लेते हैं। उनका कहना है कि फेसबुक पर ऐसे एआई कंटेंट को बड़ी उम्र के लोग काफी पसंद करते हैं।

लेकिन युवा पीढ़ी के लिए एआई उनकी आजीविका के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहा है।

जब छात्रों ने स्कॉट बोर्चेटा के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया, तो उन्होंने कहा, ‘इसे स्वीकार करो। इसके साथ काम करना सीखो। यह एक साधन है, इसे अपने काम में इस्तेमाल करो।’

लेकिन उनके इस बयान में उन परिस्थितियों का जिक्र नहीं है, जिनकी वजह से पुरानी पीढ़ी आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकी, जबकि आज के युवाओं के लिए ऐसा करना आसान नहीं है।

बोर्चेटा और उनकी पीढ़ी ऐसे समय में बड़ी हुई, जब लोगों के काम की आर्थिक व सामाजिक अहमियत आज की तुलना में कहीं ज्यादा थी।

जिन व्यवस्थाओं ने इन लोगों को सफल बनाया, वही अब नौकरी की सुरक्षा को कमजोर कर चुकी हैं और उन पेशेवर रास्तों को भी खत्म कर रही हैं, जिनसे पहले लोग आगे बढ़ते थे।

इसी कारण ‘खुद को बदलो, नहीं तो पीछे रह जाओ’ जैसी बात आज के युवाओं को सही नहीं लगती, क्योंकि उनका भविष्य लगातार बदलाव और बार-बार नए कौशल सीखने की मजबूरी से जुड़ा हुआ है।

‘जेन जेड’ का आत्मविश्वास कम होना

समस्या सिर्फ नौकरियों के हालात खराब होने की नहीं है। कई युवाओं को लगता है कि मौजूदा व्यवस्था में उनकी कोई मजबूत जगह नहीं बची है, जहां उनसे नियम मानने की उम्मीद तो की जाती है, लेकिन उनकी जरूरत धीरे-धीरे खत्म की जा रही है।

सामाजिक मनोवैज्ञानिक शोशाना जुबॉफ का कहना है कि हम ऐसे समाज में रह रहे हैं, जहां कई दशकों से चली आ रही बाजार आधारित आर्थिक व्यवस्था लोगों के आत्मसम्मान और अपने फैसले खुद लेने की क्षमता को लगातार कमजोर कर रही है।

आज की युवा पीढ़ी एक अलग तरह के संकट का सामना कर रही है, क्योंकि अब एल्गोरिदम लोगों की पसंद, फैसलों और कई दूसरी चीजों को प्रभावित कर रहे हैं। किशोर एक विरोधाभासी स्थिति में जी रहे हैं। उनसे एआई अपनाने को कहा जाता है, लेकिन वे खुद कहते हैं कि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बीसवीं सदी में बेबी बूमर पीढ़ी के पास यह तय करने की ज्यादा आजादी थी कि वे अपनी जिंदगी में प्रौद्योगिकी को किस हद तक अपनाना चाहते हैं। उनके पास प्रौद्योगिकी से दूर रहने का भी विकल्प था।

अध्ययनों से पता चलता है कि उस समय लोग अपनी जरूरत, जीवनशैली और खर्च के हिसाब से नयी प्रौद्योगिकी अपनाने का फैसला करते थे।

ईमेल और मोबाइल फोन उस समय रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी नहीं माने जाते थे।

आज की युवा पीढ़ी को लगता है कि एआई और एल्गोरिदम से बचना लगभग असंभव है, क्योंकि ये समाज के लगभग हर वर्ग की जरूरत बन चुके हैं।

प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रमुखों का कहना है कि एआई का बढ़ता इस्तेमाल तय है, लेकिन फैसले लेने वाले लोग इस बारे में युवाओं से बातचीत नहीं कर रहे हैं।

ऐसे समय में, जब लगता है कि भविष्य एआई और एल्गोरिदम तय करेंगे, युवा पीढ़ी चाहती है कि वह अपने भविष्य के बारे में खुद फैसला करे, सिर्फ एआई को बिना सोचे-समझे स्वीकार न करे।

एआई के खिलाफ ‘जेन जेड’ का खुलकर विरोध यह याद दिलाता है कि भविष्य के लिए एआई के अलावा दूसरे तरीके अपनाना अभी भी संभव है।

(द कन्वरसेशन) जोहेब वैभव

वैभव


लेखक के बारे में