सरकार राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर विदेश नीति अपना रही : नेपाल के विदेश मंत्री

Ads

सरकार राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर विदेश नीति अपना रही : नेपाल के विदेश मंत्री

  •  
  • Publish Date - September 15, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 09:32 PM IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 15 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने मंगलवार को कहा कि नेपाल सरकार देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर अपनी विदेश नीति का संचालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रतिनिधि सभा में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए खनाल ने कहा कि “पुराना बोझ” वाली बात नेपाल के गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रीय धरोहर, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय हितों की रक्षा या ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण के संदर्भ में नहीं कही गई थी।

वह सांसद सीता थापलिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। थापलिया ने इस वाक्यांश का मतलब साफ करने को कहा था और पूछा था कि पिछली सरकारों के कौन से फैसले “बोझ” माने जाते हैं; क्या नेपाल के संविधान में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा वाले नक्शे को शामिल करने का फैसला “पुराना बोझ” माना जाता है; और पिछली सरकारों की विदेश नीति में क्या गलतियां हुई थीं।

इन सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्री ने नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर विदेश नीति अपनाने के प्रति सरकार की पूरी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह देखते हुए कि नेपाल ने हमेशा पड़ोसी और मित्र देशों के साथ संबंधों को उच्च प्राथमिकता दी है, मंत्री ने विश्वास जताया कि इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में उच्च-स्तरीय यात्राएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

खनाल ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल करने वाला नेपाल का राजनीतिक नक्शा और इसे मंजूरी देने के लिए संविधान में संशोधन करने का संसद का सर्वसम्मत फैसला, नेपाल के सभी लोगों के साझा राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया, “यह हमारा संवैधानिक और संप्रभु दस्तावेज है, जिसे किसी भी संदर्भ में ‘बोझ’ के तौर पर नहीं देखा जा सकता।”

नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर सीमा विवाद रहा है और दोनों देश इन इलाकों पर अपना दावा करते हैं।

भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।

नेपाल की केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने मई 2020 में कालापानी और लिपुलेख समेत उन इलाकों को अपने आधिकारिक नक्शे में देश के अभिन्न अंग के तौर पर शामिल किया।

खनाल ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आजादी, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय एकता, स्वायत्तता, सीमा सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना किसी भी सरकार की सबसे अहम और स्थायी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पड़ोसी और मित्र देशों के साथ आपसी सम्मान, समानता, भरोसे और आर्थिक साझेदारी के आधार पर रिश्तों को एक नयी और बेहतर दिशा में ले जाना चाहती है।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा सरकार और विदेश मंत्रालय का साफ नजरिया है कि देश की आर्थिक समृद्धि को ऐसी स्पष्ट, परिपक्व और नतीजों पर केंद्रित कूटनीति के जरिये हासिल किया जाए, जो राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखती हो।

भाषा प्रशांत पारुल

पारुल