गुरचरण दास ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन’ सम्मान पाने वाले पहले भारतीय लेखक बने

गुरचरण दास ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन’ सम्मान पाने वाले पहले भारतीय लेखक बने

गुरचरण दास ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन’ सम्मान पाने वाले पहले भारतीय लेखक बने
Modified Date: August 8, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: August 8, 2026 10:27 pm IST

काठमांडू, आठ अगस्त (भाषा) प्रसिद्ध लेखक गुरचरण दास को ‘स्वतंत्रता के विकास में दीर्घकालिक योगदान’ के लिए प्रतिष्ठित ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन अवॉर्ड’ से शनिवार को सम्मानित किया गया। वह यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय लेखक हैं।

यह सम्मान स्वतंत्रता समर्थक संगठन लिबर्टी इंटरनेशनल की ओर से नेपाल के काठमांडू में आयोजित उसके 40वें विश्व सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया।

दास (82) ने कहा कि वह यह सम्मान पाकर ‘‘बहुत प्रसन्न’’ हैं। उन्होंने ‘‘आंतरिक स्वतंत्रता’’ की अवधारणा पर भी बात की, जिसे उन्होंने ‘‘उदारवाद की पश्चिमी अवधारणा में भारत का अनूठा योगदान’’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘जिंदगी में कितनी बार ऐसा होता है कि आपको उस चीज के लिए सम्मान मिले, जिसे आप पूरी निष्ठा से सही मानते हैं?’’

आयोजकों की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह पुरस्कार गुरचरण दास के उस तीन दशक से अधिक लंबे लेखकीय सफर का सम्मान है, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता, उद्यमिता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के समर्थन में भारत के आर्थिक और नैतिक विमर्श को दिशा देने का काम किया है।

बयान में कहा गया है कि दास के साहित्यिक योगदान की मुख्य कड़ी जीवन के चार पारंपरिक भारतीय लक्ष्यों पर लिखी गई चार किताबों की एक श्रृंखला है, जिसे वे ‘‘आज की दुनिया में इंसानी तरक्की के एक सदाबहार आदर्श’’ के तौर पर देखते हैं।

इनमें ‘इंडिया अनबाउंड’, ‘द डिफिकल्टी ऑफ़ बीइंग गुड’, ‘काम: द रिडल ऑफ डिजायर’ और ‘अनदर सॉर्ट ऑफ फ्रीडम’ शामिल हैं।

दास ने पूर्णकालिक लेखन को अपनाने से पहले उपभोक्ता वस्तु बनाने वाली कंपनी प्रॉक्टर एंड गैंबल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्य किया था।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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