कैसे सेउटा सीमा संकट ने स्पेन के धुर दक्षिणपंथ के लिए राजनीतिक अवसर पैदा कर दिया

कैसे सेउटा सीमा संकट ने स्पेन के धुर दक्षिणपंथ के लिए राजनीतिक अवसर पैदा कर दिया

कैसे सेउटा सीमा संकट ने स्पेन के धुर दक्षिणपंथ के लिए राजनीतिक अवसर पैदा कर दिया
Modified Date: August 2, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: August 2, 2026 5:24 pm IST

(डेनिज टोरकु, आईई यूनिवर्सिटी)

मैड्रिड, दो अगस्त (द कन्वरसेशन) अनुमान है कि सीमा व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो जाने के बाद एक ही दिन में 50,000 से अधिक प्रवासी स्पेन के छोटे से स्वायत्त शहर सेउटा में प्रवेश कर गए।

सेउटा, मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित स्पेन का एक स्वायत्त शहर है। स्पेन सरकार का कहना है कि इनमें से लगभग सभी प्रवासी बाद में मोरक्को लौट गए, जबकि इस घटना में कम से कम 57 लोगों की मौत हुई।

यह सब कैसे और क्यों हुआ, इसे लेकर कई सवाल उठे लेकिन लोगों के सामने सबसे पहले सिर्फ तस्वीरें और वीडियो आए। इनमें कुछ लोग तैरकर और कुछ सेउटा के ताराजल समुद्र तट पर चढ़कर शहर में प्रवेश करते दिखाई दिए। एक ही दिन और रात में हजारों लोग सीमा पार करते दिखे और कई लोगों की जान चली गई।

जब किसी घटना के पीछे के तथ्य और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तब सबसे पहले लोगों की कल्पना सक्रिय हो जाती है। यही कल्पना किसी देश में प्रवासन को लेकर बनने वाली सोच और जनधारणा की बुनियाद तैयार करती है।

सेउटा सीमा पर हुई यह घटना स्पेन की उस सकारात्मक छवि को चुनौती देती है, जिसे उसने वर्षों से गढ़ा है। लंबे फासीवादी शासन के बाद स्पेन ने खुद को ऐसे देश के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है, जो प्रवासन और विविधता का स्वागत करता है, जबकि यूरोप के कई अन्य देश सीमाओं को मजबूत करने और सुरक्षा दीवारें खड़ी करने पर जोर देते रहे हैं।

स्पेन पूरे विश्वास के साथ यह संदेश दुनिया के सामने रखता है कि वह यूरोप और अफ्रीका के संगम पर स्थित ऐसा देश है, जिसकी पहचान सदियों से विभिन्न संस्कृतियों के मेल से बनी है। उसने कई बार इन आदर्शों को व्यवहार में भी उतारा है। केवल छह महीने पहले ही उसने देश में रह रहे और काम कर रहे लाखों प्रवासियों में से सैकड़ों हजार लोगों के लिए वैध निवास का रास्ता खोला था।

लेकिन किसी देश की आत्म-छवि और जनमत केवल कानूनों से नहीं बनते, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम होते हैं। उनकी नींव भावनाओं पर टिकी होती है। यही कारण है कि वे कानूनों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील होते हैं और भ्रामक सूचनाओं तथा राजनीतिक दुरुपयोग का आसानी से शिकार बन जाते हैं।

तस्वीरें, शब्द और बदलती धारणाएं

लोगों की राय किस तरह बदलती है, इसे उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों से भी समझा जा सकता है।

सेउटा की घटना से एक दिन पहले तक प्रवासन को लेकर सार्वजनिक विमर्श सामान्य और संतुलित था। चर्चा का केंद्र प्रवासियों का सामाजिक समावेश, कार्य अनुमति और रोजमर्रा की प्रशासनिक प्रक्रियाएं थीं।

लेकिन सेउटा से सामने आई तस्वीरों ने पूरा परिदृश्य बदल दिया। अब सार्वजनिक विमर्श और सोशल मीडिया पर ‘‘आक्रमण’’, ‘‘युद्ध’’, ‘बाढ़’’ और ‘‘कब्जा’’ जैसे शब्द प्रमुखता से इस्तेमाल किए जाने लगे हैं।

आम लोगों के लिए इसका अर्थ यह है कि जो प्रवासी कभी पड़ोसी, सहकर्मी या किसी सहपाठी के अभिभावक के रूप में दिखाई देता था, वह अब केवल समुद्र तट पार करता एक गुमनाम चेहरा या महज एक संख्या बनकर रह गया है। किसी संख्या के प्रति संवेदना महसूस करना किसी व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। इसलिए केवल आंकड़ों में बात करने वाली भाषा बिना क्रूर प्रतीत हुए कठोर हो जाती है,।

इसी बीच, टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया पर लगातार दिख रही जैसी एक तस्वीर बिना कोई तर्क दिए ही लोगों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ देती है। जहां शब्दों को लोगों को समझाना पड़ता है, वहीं तस्वीरें सीधे भावनाओं को प्रभावित करती हैं। वे किसी भी चर्चा का शुरुआती आधार ही बदल देती हैं।

सेउटा से प्रसारित तस्वीरों ने स्पेन सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मजबूर कर दिया है, जबकि कठोर और दंडात्मक उपायों की मांग अब सामान्य और स्वाभाविक लगने लगी है। जो बातें बुधवार तक कठोर या असहज प्रतीत होती थीं, वही शुक्रवार तक संतुलित और सामान्य बयान जैसी सुनाई देने लगीं।

ऐसे माहौल में संयमित और संतुलित रुख रखने वाले लोग भोले या कमजोर नजर आने लगते हैं। बिना किसी औपचारिक घोषणा के यह स्थिति भी बदल जाती है कि अब सफाई किसे देनी है।

यह पूरा घटनाक्रम यूरोप के दक्षिणपंथी दलों के लिए एक बड़ा राजनीतिक अवसर बन गया है और वे भली-भांति जानते हैं कि इसका लाभ कैसे उठाना है। प्रवासियों की वास्तविक संख्या या तथ्यों पर वे बहस हार भी जाएं, तब भी उनका उद्देश्य पूरा हो सकता है, क्योंकि उनका मकसद स्पेन की उदार और प्रवासियों का स्वागत करने वाली छवि को झूठा साबित करना है।

जब पर्याप्त तथ्य उपलब्ध नहीं होते, तब वीडियो और तस्वीरें अनजाने में ही यह काम उनके लिए कर देती हैं।

चरमपंथी भाषा का सामान्य होना

स्पेन की प्रमुख दक्षिणपंथी विपक्षी पार्टी पार्टीडो पॉपुलर (पीपी) के नेता ने पहले ही सेउटा सीमा पार करने की इस घटना को फरवरी में लागू की गई सरकार की उस नीति से जोड़ दिया है, जिसके तहत बड़ी संख्या में प्रवासियों को वैध दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन्होंने बिना किसी ठोस प्रमाण के दावा किया कि इसी नीति ने प्रवासियों को स्पेन आने के लिए आकर्षित किया।

वहीं, स्पेन की धुर दक्षिणपंथी पार्टी वॉक्स के नेता ने इससे भी आगे बढ़ते हुए सीमा पार करने वालों को ‘‘युवाओं का आक्रमण’’ करार दिया।

अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए इन तस्वीरों की तुलना वर्ष 2013 की हॉलीवुड फिल्म ‘वर्ल्ड वॉर जेड’ के एक दृश्य से की।

सेउटा की इस घटना के बाद स्पेन के सामने सबसे बड़ा खतरा यही है कि कहीं वह अपनी उस पहचान को न खो दे, जिसके बल पर वह बिना किसी सफाई के खुद को प्रवासियों का स्वागत करने वाला और विविधता को अपनाने वाला देश कहता रहा है।

द कन्वरसेशन

खारी दिलीप

दिलीप


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