काठमांडू, 21 मार्च (भाषा) हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में फैले ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और 2000 के बाद से बर्फ पिघलने की दर दुगुनी हो गई है। वर्ष 1990 और 2020 के बीच इन ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 12 प्रतिशत कम हो गया है। यह बात आईसीआईएमओडी द्वारा शनिवार को जारी की गईं दो रिपोर्ट में कही गई।
हर साल 21 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व हिमनद दिवस के अवसर पर काठमांडू आधारित अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) द्वारा ये रिपोर्ट प्रकाशित की गईं, जो इस क्षेत्र में ग्लेशियरों में होने वाले परिवर्तनों के सबसे व्यापक प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।
आईसीआईएमओडी ने यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ‘1990 से 2020 तक हिंदू कुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में ग्लेशियरों की बदलती गतिशीलता’ और ‘एचकेएच ग्लेशियर अवेक्षण 2026: हिमालयी ग्लेशियर निगरानी के 50 वर्षों से प्राप्त अंतर्दृष्टि’ नामक रिपोर्ट से पता चलता है कि 1975 से बर्फ की मोटाई में कुल 27 मीटर तक की कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र तल से 4,500 से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस ग्लेशियर क्षेत्र का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा ऊंचाई पर निर्भर ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
आईसीआईएमओडी के महानिदेशक पेमा ग्यामत्शो ने इसे वास्तविक समय में तात्कालिक हो रहा संकट बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस सदी में बर्फ पिघलने की दर दुगुनी हो जाने के तथ्य से हम सभी को कार्रवाई करने के लिए सक्रिय होना चाहिए।’’
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से बर्फ पिघलने की दर दुगुनी हो गई है। 1990 और 2020 के बीच संबंधित ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 12 प्रतिशत कम हो गया है।
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नेत्रपाल देवेंद्र
देवेंद्र