(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 20 फरवरी (भाषा) अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ‘टैरिफ’ को शुक्रवार को रद्द कर दिया और न्यायमूर्ति ब्रेट केवानॉ ने अपने असहमति वाले फैसले में रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाये गए शुल्क (टैरिफ) का जिक्र किया।
ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल खरीदे जाने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ लगाया था।
हालांकि, उन्होंने पारस्परिक शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया, वहीं रूस से तेल खरीदने पर लगाये गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया। ट्रंप ने इस बात का जिक्र किया था कि भारत ने मॉस्को से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कच्चे तेल का आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
शुक्रवार को 6:3 के बहुमत से न्यायाधीशों ने पाया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता है।
न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस, न्यायमूर्ति सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और न्यायमूर्ति कवानॉ ने असहमति वाला फैसला लिखा।
केवानॉ ने मामले में अपने असहमति वाले निर्णय में लिखा, ‘‘विदेशी आयात पर शुल्क की तरह ही, इस मामले में विचाराधीन आईईईपीए टैरिफ भी विदेश मामलों से संबंधित हैं। सरकार के अनुसार, राष्ट्रपति ने आईईईपीए टैरिफ का इस्तेमाल चीन, ब्रिटेन और जापान सहित अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार समझौते करने में किया है।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘सरकार का कहना है कि शुल्क ने कुछ विदेशी बाजारों को अमेरिकी व्यवसायों के लिए अधिक सुलभ बनाने में मदद की है और अन्य राष्ट्रों के साथ खरबों अमेरिकी डॉलर के व्यापार सौदों में योगदान दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, इतिहास और शुल्क के पारंपरिक उपयोगों के अनुरूप, राष्ट्रपति ‘रूसी संघ और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए जारी अत्यंत संवेदनशील वार्ताओं के संबंध में आईईईपीए द्वारा प्रदत्त अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहे हैं’।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘…इसी उद्देश्य से 6 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति ने भारत पर ‘‘प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात करने’’ के लिए टैरिफ लगाया… और 6 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ने भारत पर शुल्क घटा दिया क्योंकि सरकार (ट्रंप प्रशासन) के अनुसार, भारत ने ‘‘प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘निश्चित रूप से, अधिकांश विदेश मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी कार्रवाइयां – चाहे युद्ध हो, अंतरराष्ट्रीय समझौते हों, व्यापार सौदे हों या टैरिफ – अमेरिका को घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं और यह मामला भी अपवाद नहीं है। फिर भी, विदेश मामलों के क्षेत्र में, अदालतें कानूनों की व्याख्या उसी रूप में करती हैं जैसे वे लिखे गए हैं, कांग्रेस (संसद) और राष्ट्रपति के प्रति उचित सम्मान के साथ तथा राष्ट्रपति के निर्णय पर कोई प्रश्न खड़ा किये बिना।’’
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