लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना एक ‘मजाक’ है: थरूर

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लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना एक ‘मजाक’ है: थरूर

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 10:05 AM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 10:05 AM IST

(सागर कुलकर्णी)

वॉशिंगटन, 11 मई (भाषा) कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि संसद के निचले सदन के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करना एक “मज़ाक” है और इससे यह सदन चीन की पीपुल्स कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस का एक ‘देसी’ संस्करण बन जाएगा।

हालांकि, भाजपा नेताओं ने उनके इस बयान का विरोध किया।

रविवार को कैलिफ़ोर्निया में आयोजित ‘स्टैंडफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ में भाग लेते हुए भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने कहा कि परिसीमन एक “लोकतांत्रिक आवश्यकता” है, ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने संसद की संरचना को स्थिर बनाए रखने को “बेतुका” बताया। लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 543 है।

लोकसभा सदस्य तेजस्वी सूर्या ने थरूर के बयान का जवाब देते हुए कहा कि, ‘‘1971 की जनसंख्या के आधार पर 2026 में 140 करोड़ लोगों वाले लोकतंत्र की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने थरूर के उस उदाहरण का प्रतिवाद किया जिसमें उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस का उल्लेख किया था, जिसकी सदस्य संख्या 1929 से 435 ही बनी हुई है।

भाजपा नेता और तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने दक्षिणी राज्य की कुल प्रजनन दर भारत में सबसे कम है और जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद, उत्तर भारतीय राज्यों को स्वाभाविक रूप से अधिक संख्या में सांसद मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘अब यह उत्तर भारतीय राज्यों और दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच एक बड़ा मोल-तोल है ताकि एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके और एक ऐसी संख्या पर पहुंचा जा सके जिसमें किसी को भी नुकसान न हो।’

ये तीनों नेता ‘स्टैनफोर्ड इंडिया पॉलिसी एंड इकोनॉमिक क्लब’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ‘इंडिया, यानी भारत: वृद्धि, शासन और पहचान’ शीर्षक वाले सत्र में भाग ले रहे थे।

तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर ने कहा कि 850 सदस्यों वाला लोकसभा कक्ष ‘चाइनीज पीपुल्स कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस का देसी संस्करण बन जाएगा, जहां महान नेता के आने पर आप खड़े हो जाते हैं और अपनी मेजें थपथपाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपको बोलने, बहस करने या किसी भी बात पर चर्चा करने का मौका नहीं मिलेगा। 850 तो एक मज़ाक है।’’

उन्होंने कहा कि 1929 से अमेरिका की जनसंख्या तीन गुना हो गई है, फिर भी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की संख्या 435 ही बनी हुई है, ‘‘क्योंकि वे समझते हैं कि 850 सदस्यों वाले सदन में बहस संभव नहीं है।’’

कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से नहीं जोड़ा जा सकता है और उनकी पार्टी लोकसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने पर समर्थन देने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज ही इसके लिए वोट करें। आप तत्काल वोट करा सकते हैं। इसे परिसीमन से न जोड़ें। आज की संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करें और हम सभी इसके पक्ष में वोट करेंगे।’’

थरूर ने 2027 और 2029 के बीच जारी होने वाले जनगणना के आंकड़ों का इंतजार करने और उन आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने के पक्ष में बात की।

थरूर ने कहा, ‘‘संभवतः 2034 के चुनाव के समय तक, राजनीतिक रूप से भारत का एक नया नक्शा होगा। लगभग 2027 और 2034 के बीच, अगले 50 वर्षों के लिए इस देश के भविष्य के स्वरूप के बारे में गहन चर्चा करने की आवश्यकता है।’

वहीं, अन्नामलाई ने परिसीमन प्रक्रिया की तात्कालिकता पर जोर देते हुए कहा कि वह अपने लोकसभा सदस्य को केवल समाचार पत्रों में ही देख पाते हैं क्योंकि वह 22 से 30 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सूर्या ने कहा, ‘‘आम नागरिक के लिए सांसद के पास जा कर मिलना और काम करवाना नामुमकिन है। इसलिए, परिसीमन हर 10 साल में होना चाहिए। यह सिर्फ संवैधानिक अनिवार्यता ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवश्यकता भी है, क्योंकि मौजूदा ढांचे में निर्वाचित प्रतिनिधि की जवाबदेही का कोई सवाल नहीं उठता।’’

भाषा

शोभना वैभव

वैभव