(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 10 जून (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य के पास निशाना बनाए गए अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर में सवार चालक दल के दो सदस्यों को बचाने के लिए जिस ड्रोन नाव का इस्तेमाल किया गया, उसका निर्माण टेक्सास की एक कंपनी ने किया था, जिसके संस्थापकों में भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर वैभव आल्टेकर भी शामिल हैं।
‘सैरोनिक टेक्नोलॉजी’ की ओर से विकसित ड्रोन नाव ‘कोर्सेयर’ से संचालित बचाव अभियान अमेरिकी सशस्त्र बलों की ओर से चलाया गया अपनी तरह का पहला मिशन था। अमेरिकी बल इस तरह के अभियानों के काफी समय से मानवरहित विमानों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
कैप्टन टिम हॉकिंस ने मंगलवार को कहा कि यह एक स्वचालित समुद्री नाव से संचालित अमेरिका का पहला बचाव अभियान था, जिसे एक मानव संचालक दूर से निर्देशित कर रहा था।
हॉकिंस के मुताबिक, 24 फुट लंबी ‘कोर्सेयर’ डीजल पर चलती है और 35 नॉट तक की अधिकतम रफ्तार अख्तियार कर सकती है। उन्होंने बताया कि यह ड्रोन नाव 1,000 पौंड तक का भार उठाने में सक्षम है और एक बार में 1,000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकती है।
‘सैरोनिक टेक्नोलॉजी’ की ‘लिंक्डइन प्रोफाइल’ के मुताबिक, उसने स्वचालित समुद्री नाव के उत्पादन के लिए अमेरिकी नौसेना के साथ 39.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का करार कर रखा है।
‘नेवी सील’ से 11 साल तक जुड़े रहे डीनो मवरुकास ने वैभव आल्टेकर, डग लैंबर्ट और रॉब लीहमन के साथ मिलकर सितंबर 2022 में ‘सैरोनिक टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की थी। कंपनी का मुख्यालय टेक्सास के ऑस्टिन में है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आल्टेकर ‘सैरोनिक टेक्नोलॉजी’ के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं।
कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, आल्टेकर ‘सैरोनिक टेक्नोलॉजी’ की स्वचालित प्रणालियों और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर के विकास का काम देखते हैं। वह ‘फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग’, ‘प्रोडक्ट’ और ‘स्पेशल प्रोग्राम्स’ के साथ-साथ ‘सॉफ्टवेयर’ टीम का नेतृत्व करते हैं, जिसमें उन्हें प्रोडक्ट अवधारणा, नेविगेशन, मशीन लर्निंग, कमांड एंड कंट्रोल और सिस्टम्स इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कर्मियों के साथ काम करने का मौका मिलता है।
आल्टेकर सैन्य प्रौद्योगिकी कंपनी ‘एंड्युरिल इंडस्ट्रीज’ से भी जुड़े रहे हैं, जिसने रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के लिए ‘घोस्ट शार्क’ ड्रोन पनडुब्बी सहित कई अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण किया है।
भाषा पारुल सुरेश
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