(गुरदीप सिंह)
सिंगापुर, 20 जुलाई (भाषा) सिंगापुर में रविवार को पहली बार आयोजित ‘वल्लम कली’ (सांप के आकार की नावों की दौड़) में 400 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इस रेस के साथ ही भारतीय मूल के मलयाली समुदाय ने ओणम के महीने भर चलने वाले जश्न की शुरुआत की।
केरल का सबसे बड़ा फसल उत्सव ‘ओणम’ और उससे जुड़ी पारंपरिक ‘वल्लम कली’ को दुनिया भर में भारतीय मूल के मलयाली समुदाय अपनी विरासत को संजोए रखने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दावतों और सामुदायिक मिलन-समारोहों के जरिए मनाते हैं।
सिंगापुर के 70 साल पुराने कैराली कला निलयम द्वारा आयोजित, जुरोंग लेक पर रविवार के कार्यक्रम में 10-10 नौका चालकों वाली 11 टीम शामिल हुईं और इसके साथ चेंदा मेलम (एक ताल-वाद्य समूह) और पारंपरिक संगीत भी था।
कैराली विदेशों में मौजूद सबसे पुराने मलयाली सांस्कृतिक संगठनों में से एक है। सिंगापुर में इस समुदाय की मौजूदगी एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है; ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत से कई लोग यहां आकर बसे थे।
कैराली के सचिव ए.बी.एस. मनोज ने कहा कि इन समारोहों को सभी को साथ लेकर चलने वाला बनाया गया था, जिसमें मलयाली समुदाय के साथ-साथ सिंगापुर के लोग, प्रवासी कामगार और अलग-अलग जातीय पृष्ठभूमि के निवासी भी शामिल हुए।
मनोज ने कहा, “संस्कृति को सिर्फ अतीत की चीज मानकर उसे संजोने के बजाय, हमारा मानना है कि यह एक जीवंत अनुभव होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि महीने भर चलने वाले इस कार्यक्रम का मकसद संवाद परक सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए युवा पीढ़ी को जोड़ना है।
सिंगापुर में लगभग 40,000 मलयाली रहते हैं।
भाषा प्रशांत नरेश
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