इनडोर वायु प्रदूषण वैश्विक स्वास्थ्य समस्या, केवल घरेलू ईंधन तक सीमित नहीं

इनडोर वायु प्रदूषण वैश्विक स्वास्थ्य समस्या, केवल घरेलू ईंधन तक सीमित नहीं

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 12:02 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 12:02 PM IST

(अविदेश सीनाथ – ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, स्कॉट महादेव – रीडिंग यूनिवर्सिटी )

लंदन, 14 जनवरी (द कन्वरसेशन) घरों के अंदर या अन्य बंद जगहों पर होने वाले वायु प्रदूषण को अक्सर पश्चिमी देशों में घरेलू हीटिंग या जीवनशैली से जुड़ा मुद्दा माना जाता है, जबकि विकासशील देशों में इसे ईंधन की कमी होने और लकड़ियां या अन्य ठोस ईंधन जलाकर खाना पकाने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, एक नए वैश्विक अध्ययन में कहा गया है कि ये दोनों बहसें दरअसल एक ही सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के अलग-अलग पहलू हैं।

150 देशों में वायु प्रदूषण से होने वाली मृत्यु के जोखिम का विश्लेषण करने वाले इस अध्ययन के अनुसार, घरों के भीतर वायु प्रदूषण सहित कुल वायु प्रदूषण दुनिया भर में समय से पहले होने वाली मौतों में बड़ा योगदान देता है। प्रदूषण के स्रोत और स्तर विभिन्न देशों के बीच अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इनडोर वायु प्रदूषण सभी आय वर्ग वाले देशों में मृत्यु जोखिम बढ़ाता है।

अध्ययन में कहा गया है कि जब इनडोर प्रदूषक फेफड़ों में प्रवेश करते हैं, तो वे सूजन पैदा करते हैं और हृदय तथा श्वसन तंत्र पर दीर्घकालिक दबाव डालते हैं। यह जैविक प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के चूल्हे से हो या आधुनिक फ्लैट में खराब वेंटिलेशन वाले गैस कुकर से, मूल रूप से समान रहती है।

शोधकर्ताओं ने घरेलू स्तर पर व्यवहार का अध्ययन करने के बजाय देश-स्तरीय रुझानों का विश्लेषण किया और यह देखा कि स्वच्छ ईंधन, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों की उपलब्धता का वायु प्रदूषण से होने वाली मृत्यु दर से क्या संबंध है।

अध्ययन के अनुसार, ब्रिटेन जैसे देशों में, जहां स्वच्छ घरेलू ऊर्जा और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियां उपलब्ध हैं, वायु प्रदूषण से जुड़ा मृत्यु जोखिम काफी कम है। इसके विपरीत, बेनिन, कैमरून, गिनी, सिएरा लियोन और टोगो जैसे देशों में, जहां ऊर्जा की कमी व्यापक है, जोखिम कहीं अधिक है।

शोध में यह भी सामने आया कि स्वच्छ ईंधन और भरोसेमंद बिजली तक पहुंच, साथ ही अधिक स्वास्थ्य व्यय, वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के जोखिम को कम करता है। वहीं, ग्रामीण आबादी का अधिक होना और घरेलू ऊर्जा की सीमित उपलब्धता जोखिम बढ़ाती है।

अध्ययन के अनुसार, इनडोर और आउटडोर वायु प्रदूषण को अलग-अलग समस्याओं के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों इस बात से जुड़े हैं कि ऊर्जा कैसे पैदा की जाती है, कैसे इस्तेमाल होती है और कैसे नियंत्रित की जाती है।

ब्रिटेन जैसे देशों में, जहां लोग सर्दियों में अधिक समय घर के भीतर बिताते हैं, हीटिंग, खाना पकाने और कम वेंटिलेशन से इनडोर प्रदूषण बढ़ सकता है। वहीं विकासशील देशों में समस्या के समाधान के लिए खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन, ग्रामीण विद्युतीकरण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इनडोर वायु प्रदूषण को केवल विकासशील देशों की समस्या या केवल घरेलू आदतों का मुद्दा मानना सही नहीं है। इसे एक साझा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखने की जरूरत है, जिससे इसके समाधान के लिए नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाए जा सकें।

( द कन्वरसेशन )

मनीषा वैभव

वैभव