वारसॉ, 27 जनवरी (एपी) बर्लिन में मंगलवार को भोर में नरसंहार स्मारक पर मोमबत्तियां जलाई गईं और यूरोप तथा इससे बाहर लोगों की गतिविधि अंतरराष्ट्रीय नरसंहार स्मरण दिवस मनाने के लिए थम सी गई। यह दिन नाज़ी जर्मनी द्वारा लाखों लोगों की हत्या और महाद्वीप से यहूदियों को पूरी तरह खत्म करने के लिए किए गए कृत्यों की याद दिलाता है।
अंतरराष्ट्रीय नरसंहार स्मरण दिवस 27 जनवरी को विश्व भर में मनाया जाता है, जो नाजी जर्मनी के सबसे कुख्यात मृत्यु शिविरों में से एक ‘ऑशविट्ज़-बिरकेनाउ’ को सोवियत सेनाओं द्वारा मुक्त कराए जाने का दिन है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन कब्जे वाले क्षेत्र में शामिल रहे ऑशविट्ज़ में स्थित स्मारक स्थल पर पूर्व कैदियों ने ‘मृत्यु दीवार’ पर पुष्पांजलि अर्पित की, जहां जर्मन सेना ने हजारों लोगों की हत्या की थी, जिनमें से अधिकतर पोलैंड के नागरिक थे।
दिन में बाद में, पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी पास के विशाल स्थल बिरकेनौ में उस त्रासदी को देखने वाले जीवित बचे लोगों के साथ एक स्मरण समारोह में शामिल होंगे। इस स्थल पर यूरोप भर से यहूदियों को गैस चैंबरों में मार डालने के लिए लाया गया था।
नाज़ी जर्मन सेना ने ऑशविट्ज़ में लगभग 11 लाख लोगों की हत्या की थी, जिनमें से अधिकतर यहूदी थे, लेकिन पोलिश, रोमा और अन्य लोग भी शामिल थे।
रेड आर्मी द्वारा 27 जनवरी, 1945 को ऑशविट्ज़ को मुक्त कराए जाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मंगलवार को पूरे यूरोप में और साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भी समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
अपने पड़ोसियों पर युद्ध और नरसंहार थोपने वाला राष्ट्र जर्मनी बुधवार को संसद भवन (बुंडेस्टैग) में एक स्मरण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
इजराइल अप्रैल 1943 में हुए वारसॉ यहूदी बस्ती विद्रोह की वर्षगांठ पर नरसंहार स्मरण दिवस मनाता है, जो नाजी आतंक के खिलाफ यहूदी प्रतिरोध पर जोर देता है।
नरसंहार की भयावहता अपनी आंखों से देखने वालों में अनुमानित 1,96,600 यहूदी अब भी जीवित हैं। एक साल पहले यह अनुमानित संख्या 2,20,000 थी।
एपी नेत्रपाल माधव
माधव