दुबई, एक मार्च (एपी) ईरान ने रविवार को इजराइल और खाड़ी अरब देशों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। इजराइल और अमेरिका के हमले में अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उसने दोनों देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का संकल्प जताया है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान हमले तेज नहीं करे, वरना अमेरिका ‘‘ऐसी ताकत के साथ जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा।’’
ईरान ने शनिवार को तेहरान स्थित खामेनेई के कार्यालय पर हुए इजराइल-अमेरिका के हवाई हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत हो गई।
इस घटना के बाद इस्लामी गणराज्य के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
ट्रंप ने कहा, ‘‘ईरान के लोगों के लिए अपने देश को अपने हाथ में लेने का यह सबसे बड़ा मौका है।’’
ईरान के मंत्रिमंडल ने संकल्प जताया है कि इस ‘‘अपराध का जवाब जरूर दिया जाएगा’’ और अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने इजराइली एवं अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए अब तक का अपना ‘‘सबसे तीव्र आक्रामक अभियान’’ शुरू करने की धमकी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘आपने सीमाएं लांघ दी हैं और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी। हम आपको ऐसा करारा जवाब देंगे कि आप खुद रहम की भीख मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।’’
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए रविवार को यह टिप्पणी ऐसे समय की जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बाद उन्हें धमकियां मिली हैं।
उन्होंने लिखा, ‘‘ईरान ने अभी-अभी कहा है कि वह आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना उसने पहले कभी नहीं किया।’’
इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान की रक्षा परिषद की बैठक को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में ईरान के सैन्य प्रमुख और रक्षा मंत्री मारे गए।
हमले के दौरान बैठक में शामिल जनरल अब्दोल रहीम मूसावी और रक्षा मंत्री जनरल अजीज नासिरजादेह की मौत हो गई। इससे पहले ईरान ने रविवार सुबह ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के प्रमुख और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी की मौत की घोषणा की थी।
हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा तैनात किया है।
ईरान ने कहा था कि उसे युद्ध टलने की उम्मीद है लेकिन उसने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार को बरकरार रखा।
इसने कहा कि उसने जून के बाद से परमाणु संवर्धन नहीं किया है, लेकिन उसने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को उन स्थलों का दौरा करने से रोक दिया जिन पर अमेरिका ने बमबारी की थी।
इजराइल ने कहा कि इस अभियान की योजना अमेरिका के साथ मिलकर महीनों पहले बनाई गई थी। इजराइली सेना के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने एक बयान में कहा कि वायुसेना के पायलटों ने ‘‘पूरे ईरान में सैकड़ों ठिकानों’’ पर हमला किया।
अभियान की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि इजराइल के अभियान में ईरान की सेना, सरकारी प्रतिष्ठान और खुफिया ठिकाने शामिल थे।
दक्षिणी ईरान में स्थानीय गवर्नर ने ईरानी सरकारी टीवी को बताया कि लड़कियों के एक स्कूल पर हमले में कम से कम 115 लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए। अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि उन्हें ‘‘लड़कियों के स्कूल पर हमले की खबरों की जानकारी है’’ और अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
वहीं, एक ईरानी राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि हमलों में सैकड़ों नागरिक हताहत हुए हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने लामर्द क्षेत्र के गवर्नर अली अलीजादेह के हवाले से बताया कि दक्षिण-पश्चिम में कम से कम 15 लोग मारे गए हैं।
एपी सुरभि नेत्रपाल
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