रोम, 30 जुलाई (एपी) इटली की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है कि जन्म से इटली और किसी अन्य देश की नागरिकता रखने वाला बच्चा, उसके माता-पिता द्वारा बाद में किसी दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण कर लेने मात्र से अपनी इतालवी नागरिकता नहीं खोएगा।
इस फैसले से दुनिया भर में बसे इतालवी मूल के लोगों के वंशजों के नागरिकता संबंधी दावों को बल मिलने की उम्मीद है।
यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे ‘माइनर इश्यू’ नामक कानूनी विवाद का समाधान करता है, जिसने 19वीं सदी के उत्तरार्ध और 20वीं सदी की शुरुआत में इटली से विस्थापित परिवारों के हजारों नागरिकता मामलों पर असर डाला था।
रविवार को दिए गए इस फैसले में ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ की सर्वोच्च पीठ ने कहा कि रक्त संबंध के आधार पर नागरिकता के सिद्धांत के तहत जन्म से इतालवी नागरिक बने बच्चे की नागरिकता उसके माता-पिता द्वारा बाद में किसी अन्य देश की नागरिकता लेने से स्वत: समाप्त नहीं होती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका समेत उन देशों में जन्मे बच्चे, जहां जन्म लेते ही नागरिकता मिल जाती है, अपने माता-पिता के बाद में उस देश की नागरिकता ग्रहण कर लेने पर भी अपनी इतालवी नागरिकता नहीं खोएंगे। चूंकि उनकी इतालवी नागरिकता बनी रहेगी, इसलिए वे इसे अपनी संतान और आगे की पीढ़ियों को भी हस्तांतरित कर सकेंगे।
मामले में आवेदकों की ओर से पैरवी करने वाले वकील मार्को मेलोन ने कहा कि इस फैसले ने कानून की उस सख्त व्याख्या को पलट दिया है, जिसके कारण हाल के वर्षों में वंशानुगत इतालवी नागरिकता के कई दावे खारिज कर दिए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों के दावों की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, जिनके आवेदन केवल ‘माइनर इश्यू’ के आधार पर खारिज किए गए थे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इटली का गृह मंत्रालय और उसके वाणिज्य दूतावास इस फैसले के अनुरूप अपने प्रशासनिक तौर-तरीकों में बदलाव करेंगे या नहीं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इटली में वंशानुगत नागरिकता की मांग लगातार बढ़ रही है और इस अधिकार के दायरे को लेकर कानूनी विवाद भी तेज हो गए हैं।
एपी गोला सिम्मी
सिम्मी