पारामारिबो, सात मई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत सूरीनाम की विकास क्षमता को पहचानता है और उसकी प्रगति यात्रा में एक भरोसेमंद ‘‘सहयात्री एवं भागीदार’’ बना रहेगा।
जयशंकर ने संयुक्त आयोग की बैठक के बाद प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि भारत और सूरीनाम व्यापार, पर्यटन, डिजिटल क्षमताओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के लिए ‘‘अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य और उद्देश्य’’ निर्धारित किए गए।
विदेश मंत्री 2 से 10 मई तक तीन कैरेबियायई की देशों की यात्रा पर हैं। वह बुधवार को सूरीनाम पहुंचे।
भारत द्वारा समर्थित विकास परियोजनाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने हाल में पूरी हुई एक फल प्रसंस्करण इकाई और दूरदराज के क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए ‘प्रारंभिक चेतावनी सेवा वितरण परियोजना’ पर प्रकाश डाला।
मंत्री ने कहा कि भारत और लातिन अमेरिकी तथा कैरेबियाई क्षेत्र के बीच व्यापार वर्तमान में सालाना लगभग 40 से 45 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है।
क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल प्रथाओं एवं क्षमताओं में अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है क्योंकि देश ‘‘एआई युग’’ में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हाल में नयी दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में आपकी (सूरीनाम की) सरकार की ओर से मंत्रिस्तरीय भागीदारी थी, और वहां इस बात पर चर्चा हुई कि हम अपनी-अपनी विशेष परिस्थितियों के लिए एआई को कैसे अपनाएं और तैनात करें।’’
जयशंकर ने कहा, “सूरीनाम प्रगति के पथ पर अग्रसर है, हम आपकी विकास क्षमता को पहचानते हैं, हम आपके लिए आगे का मार्ग देखते हैं, और हम आपको आश्वस्त करना चाहते हैं कि हम इस यात्रा में आपके सहयात्री एवं भागीदार हैं।”
भारत और सूरीनाम को ‘‘साझा इतिहास एवं ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति समान प्रतिबद्धता वाले दो राष्ट्र’’ बताते हुए, जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय निकायों में मिलकर काम किया है।
भाषा नेत्रपाल नरेश
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