बांग्लादेश ने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए चीन से समर्थन मांगा

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बांग्लादेश ने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए चीन से समर्थन मांगा

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 08:45 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 08:45 PM IST

(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, सात मई (भाषा) तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चीन से समर्थन मांगा है। यह कदम भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर डाल सकता है।

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संगबाद संस्था’ (बीएसएस) के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और चीन के उनके समकक्ष वांग यी के बीच बुधवार को बीजिंग में हुई बैठक में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनरुद्धार परियोजना (टीआरसीएमआरपी) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह सिंचाई एवं लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।

बांग्लादेश की नयी सरकार के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए वांग ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की कसौटी पर खरे उतरे हैं और निरंतर अधिक परिपक्व और स्थिर हुए हैं।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वांग ने कहा कि चीन बांग्लादेश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और राष्ट्रीय गरिमा के साथ ही उसके लोगों द्वारा चुने गए विकास मार्ग और राजनीतिक प्रणाली का भी सम्मान करता है, और ढाका को स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने में समर्थन देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन के बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ संबंध किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करते, और न ही इन्हें किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित होना चाहिए। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से ढाका और बीजिंग के बीच घनिष्ठ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं की ओर इशारा करती है।

वांग ने कहा कि सरकार चीन की कंपनियों को बांग्लादेश में निवेश के लिए भी प्रोत्साहित करेगी।

तारिक रहमान के फरवरी में सत्ता संभालने के बाद यह उनकी चीन की पहली यात्रा है। वह पांच मई को यहां पहुंचे और बृहस्पतिवार को यहां से रवाना होंगे।

रहमान पिछले महीने भारत आए थे। भारतीय नेताओं के साथ उनकी वार्ता पर बीजिंग में करीबी नजर रखी गई, क्योंकि शेख हसीना के सत्ता से हटाने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार चीन और पाकिस्तान के करीब आई थी और बांग्लादेश और भारत के संबंधों में तनाव आ गया था।

चीन कई वर्ष से टीआरसीएमआरपी के विकास में रुचि दिखाता रहा है, जो भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे के पास स्थित है। यह इसकी मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।

इस पृष्ठभूमि में भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण सहायता की पेशकश की थी जो सीमा-पार नदी प्रबंधन पर ढाका के साथ सहयोग बढ़ाने के नयी दिल्ली के प्रयासों को दर्शाता है।

जल बंटवारा द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है और गंगा नदी के शुष्क मौसम में जल बंटवारे को नियंत्रित करने के लिए 1996 में 30 वर्ष के लिए हस्ताक्षरित भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि को यदि नवीनीकृत नहीं किया गया तो यह इस वर्ष समाप्त होने वाली है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल के वर्षों में चीन ने बांग्लादेश में अपनी आर्थिक एवं कूटनीतिक उपस्थिति का विस्तार किया है।

भाषा आशीष धीरज

धीरज