जयशंकर का पोलैंड के समकक्ष से मुलाकात : व्यापार, निवेश और रक्षा के मुद्दे पर हुई चर्चा

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जयशंकर का पोलैंड के समकक्ष से मुलाकात : व्यापार, निवेश और रक्षा के मुद्दे पर हुई चर्चा

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  • Publish Date - September 4, 2026 / 10:44 PM IST,
    Updated On - September 4, 2026 / 10:44 PM IST

वारसॉ, चार सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेशमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, रक्षा और ऊर्जा के साथ-साथ जटिल वैश्विक चुनौतियों और यूक्रेन व पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर भी चर्चा की।

जयशंकर यूक्रेन की राजधानी कीव से पौलैंड की राजधानी वारसॉ पहुंचे और यहां के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से भी मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर चर्चा की, साथ ही यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत हमारी रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर केंद्रित रही। हमने यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया, आईएमईसी और जी20 पर विचारों का आदान-प्रदान किया।’’

जयशंकर और पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की ने बातचीत के दौरान ‘संयुक्त कार्ययोजना 2024-28’ की प्रगति की समीक्षा की। इसमें व्यापार और निवेश, अंतरिक्ष, डिजिटल, एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा, शिक्षा, जहाजरानी, खनन और ऊर्जा, लोगों के बीच आपसी संबंध, संस्कृति और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने से दोनों पक्षों के बीच आपसी सहयोग और भी मजबूत होगा।

जयशंकर ने सिकोरस्की के साथ बातचीत के बाद आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और भोजन, ईंधन व उर्वरक सुरक्षा समेत कई जटिल वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की।

उन्होंने अपनी यूक्रेन यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘उप-प्रधानमंत्री और मैंने कुछ अहम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। इनमें सबसे खास है यूक्रेन युद्ध, जो अब अपने पांचवें साल में है… मैं खुद अभी कीव से ही यहां आया हूं।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत का मानना ​​है कि कभी न खत्म होने वाले युद्ध की जगह इसे खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। ऐसे युद्ध में कोई नहीं जीतता। हर अतिरिक्त दिन का अभिप्राय है और अधिक मौतें, और ज़्यादा तबाही, शामिल पक्षों का और ज़्यादा नुकसान और बाकी दुनिया पर और ज़्यादा बोझ।’’

उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से यह चिंता जताई थी।

एक सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत यूक्रेन और रूस, दोनों के ही लगातार संपर्क में रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह कोशिश कर रहे हैं कि क्या ऐसे कोई विचार और सुझाव हैं जिन्हें इस तरह से आगे बढ़ाया जा सके कि वे संघर्ष को कम करने, और आदर्श रूप से, उसे पूरी तरह खत्म करने में योगदान दे सकें।’’

भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर जयशंकर ने कहा कि यह मुद्दा एक टकराव का है और इसका समाधान बातचीत में है, न कि व्यापार में।

विदेश मंत्री ने एक और सवाल के जवाब में कहा, ‘‘यह युद्ध इसलिए खत्म नहीं होगा कि किसी ने तेल, एल्युमिनम, उर्वरक, धातु या खनिज खरीदने या न खरीदने का फ़ैसला किया। यह युद्ध तब खत्म होगा जब कूटनीति होगी, बातचीत होगी और बातचीत के जरिए समझौता होगा। इसलिए, मुझे लगता है कि हमें समस्या को सही ढंग से समझना चाहिए।’’

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष, पश्चिम एशिया के हालात और हिंद-प्रशांत में हो रही गतिविधियों पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि दुनिया न केवल कई युद्धों का सामना कर रही है, बल्कि भोजन, ईंधन और उर्वरक की उपलब्धता जैसी गंभीर चुनौतियों से भी जूझ रही है। मंत्री ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती एक अलग लेकिन अतिरिक्त चिंता का विषय है।

जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने उस कार्य योजना की समीक्षा की, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी की दो साल पहले पोलैंड यात्रा के दौरान सहमति बनी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हम साइबर सुरक्षा , अंतरिक्ष, स्वच्छ कोयला, गोपनीय जानकारी , आवश्यक खनिज आदि जैसे कई क्षेत्रों में समझौतों पर काम कर रहे हैं। और मुझे भरोसा है कि इनसे हमारे रिश्तों को और मज़बूती मिलेगी।’’

उन्होंने घोषणा की कि ‘जाम साहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम’ का दूसरा संस्करण अक्टूबर में आयोजित किया जाएगा।

बाद में, उन्होंने भारत-पोलैंड संसदीय समूह से मुलाकात की और भारत-पोलैंड के बीच सामयिक संबंध बनाने के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने ईयू के साथ द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक संदर्भ में क्षेत्र में हो रहे अन्य घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।

भाषा धीरज रंजन

रंजन