नेपाल बाढ़: मृतक संख्या बढ़कर 270 हुई, बचावकर्मी आपदा पीड़ितों की तलाश में जुटे

नेपाल बाढ़: मृतक संख्या बढ़कर 270 हुई, बचावकर्मी आपदा पीड़ितों की तलाश में जुटे

नेपाल बाढ़: मृतक संख्या बढ़कर 270  हुई, बचावकर्मी आपदा पीड़ितों की तलाश में जुटे
Modified Date: August 27, 2026 / 06:48 pm IST
Published Date: August 27, 2026 6:48 pm IST

काठमांडू, 27 अगस्त (भाषा) नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है और इस त्रासदी में 288 भारतीय पर्यटकों समेत सैंकड़ों लोग लापता हैं जिनकी तलाश युद्धस्तर पर जारी है।

तिब्बत से अचानक आई भीषण बाढ़ ने बुधवार को मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई।

बाढ़ के पानी ने कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में लेते हुए महत्वपूर्ण पुलों को बहा दिया तथा करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को ठप कर दिया।

तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बढ़े बाढ़ के पानी ने कई जिलों को प्रभावित किया।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं, जिनमें से 590 पर्यटक हैं।

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बताया कि लापता लोगों में 288 भारतीय शामिल हैं।

नेपाल के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के संशोधित विश्लेषण के अनुसार, ग्लेशियर के ढहने या हिमस्खलन के कारण यह विनाशकारी बाढ़ आई।

हिमस्खलन के कारण भोटे कोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में बाढ़ का कहर टूटा।

बाढ़ ने सबसे पहले तिब्बत की सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले को प्रभावित किया, जो राजधानी काठमांडू से करीब 160 किलोमीटर दूर है।

इसके बाद कई फुट ऊंचा मलबे और पानी का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा तथा कई जिलों में भारी तबाही मचाई।

सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में इमारतों, वाहनों, पेड़ों, लोगों और जानवरों को बाढ़ के तेज बहाव में बहते हुए देखा गया।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा, ‘‘हजारों परिवारों के घर तबाह हो गए और अब तक कई लोग लापता हैं। हम अब भी इस आपदा से हुए नुकसान का पूरा आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

नेपाल पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि 93 अन्य शव बरामद किए जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 270 हो गई।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभि नारायण काफले के अनुसार, अब तक चितवन से 108, नवलपरासी पूर्व से 62, धादिंग से 27, गोरखा से 20, रसुवा से 17, नवलपरासी पश्चिम से 15, नुवाकोट से 12 और तनहुन से नौ शव बरामद किये गये हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना के कम से कम 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

इसी तरह विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले करीब 160 लोग भी लापता हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि 476 विदेशी और 114 नेपाली नागरिकों समेत कुल 590 पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाने की सूचना है।

विदेशी पर्यटक अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, इटली और दक्षिण कोरिया समेत 30 से अधिक देशों के हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस बीच, अधिकांश भारतीय पर्यटक तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंड की यात्रा पर जा रहे थे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान जारी है।

सुरक्षाकर्मी और स्थानीय अधिकारी लापता लोगों की तलाश में नदी के किनारे एवं निचले इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।

अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को रसुवा में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों को बचाया। इनमें 11 भारतीय, चार दक्षिण कोरियाई, दो इतालवी और दो अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बचाए गए आठ अन्य पर्यटकों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

नेपाल सेना की मदद से उन्हें दोपहर में हवाई मार्ग से काठमांडू पहुंचाया गया। बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 मोटर वाले पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़क क्षतिग्रस्त हुई है।

रसुवा में अचानक आई बाढ़ के बाद अवरुद्ध हुई धादिंग की गल्छी-बैरेनी सड़क को फिर से खोलने के प्रयास जारी हैं।

यह सड़क महत्वपूर्ण है क्योंकि यह काठमांडू को नेपाल के अन्य हिस्सों से जोड़ती है और क्षेत्र में नाकेबंदी तथा आपदा प्रबंधन अभियानों के दौरान भारी एवं हल्के वाहनों के लिए प्रमुख आवागमन मार्ग आधार के रूप में काम करती है।

सशस्त्र पुलिस बल के जवानों और स्थानीय लोगों को सड़क से मलबा हटाने के काम में लगाया गया है।

सुरक्षाकर्मी और स्थानीय लोग मलबा हटाकर इस मार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं।

इस बीच, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका का दौरा किया।

समाचार पोर्टल ‘माई रिपब्लिका’ के अनुसार, आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक आकलन है कि हिमस्खलन से नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुक गया, जिसके कारण यह बाढ़ आई।

आकलन के अनुसार त्रिशुली नदी में आई बाढ़ का कारण ऊपरी धारा में हिमस्खलन का सैलाब आने से ल्हेंदे नदी का मार्ग अवरुद्ध होना था।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में सीमा क्षेत्र में हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे नदी में मलबे के साथ बाढ़ आई।

प्राधिकरण ने बताया, ‘‘तिमुरे से होकर गुजरने के बाद यही बाढ़ त्रिशूली नदी में पहुंचती हुई प्रतीत होती है।’’

बाढ़ के कारणों को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने बुधवार को संसद को बताया था कि तिब्बत क्षेत्र में स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे भूकंप आया और इसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली।

काठमांडू के नागढुंगा से मुगलिंग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह काठमांडू को देश के अन्य जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग है।

इसी तरह इलाम जिले के मेची राजमार्ग, कावरे के बीपी राजमार्ग, मकवानपुर के कांति लोकपथ, रसुवा और नुवाकोट के राष्ट्रीय राजमार्ग, धादिंग के पृथ्वी राजमार्ग तथा चितवन और रुकुम वेस्ट में जाजरकोट-डोल्पा सड़क खंड को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात रोक दिया गया है।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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