यरुशलम, 21 जनवरी (एपी) इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है।
इस घोषणा से पहले नेतन्याहू के कार्यालय ने गाजा पर निगरानी के लिए बोर्ड की कार्यकारी समिति की संरचना की आलोचना की थी।
ट्रंप के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की परिकल्पना मूल रूप से विश्व के कुछ चुनिंदा नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में की गई है, जो गाजा युद्धविराम योजना की देखरेख करेगा।
ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं अब एक व्यापक अवधारणा में तब्दील हो गई हैं, जिसमें ट्रंप ने दर्जनों देशों को निमंत्रण भेजा है और संकेत दिया है कि यह जल्द ही वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करेगा।
नेतन्याहू की यह घोषणा उनके पहले के रुख के विपरीत है। उसमें कहा गया था कि गाजा कार्यकारी समिति की संरचना के लिए इजराइल की सरकार के साथ समन्वय नहीं किया गया और यह उसकी नीति के प्रतिकूल है। समिति में उसका प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी तुर्किये शामिल है।
बोर्ड में शामिल होने का नेतन्याहू का फैसला उनके गठबंधन में शामिल कुछ धुर दक्षिणपंथी सहयोगी दलों के साथ टकराव को बढ़ावा दे सकता है। इजराइल के वित्त मंत्री बेजालिल स्मोतरिक ने बोर्ड की निंदा की थी और इजराइल से गाजा के भविष्य के बारे में एकपक्षीय तरीके से जिम्मेदारी संभालने का आह्वान किया था।
संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, वियतनाम, कजाकिस्तान, हंगरी, अर्जेंटीना और बेलारूस बोर्ड में शामिल हो चुके हैं।
इनके अलावा ब्रिटेन, कनाडा, मिस्र, रूस, तुर्किये और यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा समेत अन्य देशों का कहना है कि उन्हें निमंत्रण मिला है लेकिन उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया है।
नेतन्याहू की घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने के लिए रवाना हुए हैं।
अभी कई चीजें अस्पष्ट हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि और कितने नेताओं को या किन नेताओं को निमंत्रण दिया जाएगा।
ट्रंप से मंगलवार को जब एक संवाददाता ने पूछा कि क्या संयुक्त राष्ट्र की जगह इस बोर्ड को लेनी चाहिए तो उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा हो सकता है।’’
उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र बहुत मददगार नहीं रहा है और अपनी क्षमताओं पर खरा नहीं उतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन संयुक्त राष्ट्र को जारी रहना चाहिए क्योंकि उसकी क्षमता बहुत अधिक है।
इस मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है और कुछ लोगों का कहना है कि ट्रंप संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप के निमंत्रण के जवाब में फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बेरोट ने मंगलवार को कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा पेश शांति योजना को लागू करने के लिए हां है, जिसका हम पूरे दिल से समर्थन करते हैं, लेकिन ऐसा संगठन बनाने के लिए हमारी ना है जो संयुक्त राष्ट्र की जगह लेगा।’’
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बोर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना की बात सुनकर ट्रंप ने सोमवार को कहा, ‘‘वैसे भी कोई उन्हें नहीं चाहता। वह वैसे भी बहुत जल्द पद से हटने वाले हैं।’’
गाजा कार्यकारी समिति से अलग संस्थापक कार्यकारी समिति के सदस्यों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं।
एपी वैभव प्रशांत
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