ढाका, 17 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नवनिर्वाचित सांसदों ने देश में हुए आम चुनाव के छह दिन बाद मंगलवार को शपथ ली।
अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से वंचित किए जाने के बाद हुए 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं और मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नसीरुद्दीन ने संसद भवन (जातीय संसद भवन) में सांसदों को पद की शपथ दिलाई। निवर्तमान स्पीकर शिरीन शरमिन चौधरी के इस्तीफे के कारण यह शपथ संवैधानिक विकल्प के तहत कराई गई।
बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) शमसुल हक को स्पीकर की अनुपस्थिति में सांसदों को शपथ दिलाने का दायित्व पूरा करना था। लेकिन हक को छात्रों के नेतृत्व वाले हिंसक आंदोलन ‘जुलाई अपराइजिंग’ के बाद जेल भेज दिया गया था। इसी आंदोलन के चलते अवामी लीग सरकार का पतन हुआ था।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, बहुमत प्राप्त दल द्वारा अपने नेता के चुनाव के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाएंगे और बीएनपी औपचारिक रूप से सत्ता संभालेगी। संविधान के तहत राष्ट्रपति बहुमत दल के नेता को सरकार गठन का निमंत्रण देते हैं और मंत्रिमंडल को शपथ दिलाते हैं।
बीएनपी ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे और वही मंत्रिमंडल का नेतृत्व करेंगे। पार्टी पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि रहमान को ही प्रधानमंत्री बनाया जाएगा।
हालांकि, बीएनपी ने आम चुनाव के साथ कराए गए जनमत-संग्रह के तहत ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया है। यह दूसरी शपथ तथाकथित ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करने की प्रतिबद्धता से जुड़ी है, जिसमें संविधान में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, जनमत-संग्रह में 60 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने ‘हां’ में मतदान किया।
बीएनपी की नीति-निर्धारण स्थायी समिति के सदस्य और नवनिर्वाचित सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने शपथ ग्रहण से पहले पार्टी सांसदों से कहा कि उन्हें संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में निर्वाचित नहीं किया गया है और अभी तक परिषद से संबंधित कोई प्रावधान संविधान में शामिल नहीं किया गया है।
पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान की मौजूदगी में उन्होंने कहा, “हममें से कोई भी दूसरी शपथ नहीं लेगा।”
भाषा
मनीषा वैभव
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