पाकिस्तान में 2026 की पहली छमाही में बाल हिंसा एवं दुर्व्यवहार के 1,900 से अधिक मामले: नेता

पाकिस्तान में 2026 की पहली छमाही में बाल हिंसा एवं दुर्व्यवहार के 1,900 से अधिक मामले: नेता

पाकिस्तान में 2026 की पहली छमाही में बाल हिंसा एवं दुर्व्यवहार के 1,900 से अधिक मामले: नेता
Modified Date: September 12, 2026 / 10:35 am IST
Published Date: September 12, 2026 10:35 am IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 12 सितंबर (भाषा) पाकिस्तान में इस वर्ष के शुरुआती छह महीनों में बच्चों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार के 1,900 से अधिक मामले सामने आए। पाकिस्तान की एक वरिष्ठ नेता ने यह जानकारी दी।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की उपाध्यक्ष एवं सांसद शेरी रहमान ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान जारी कर इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, ‘‘इन मामलों का स्तर बेहद चिंताजनक है।’’

उन्होंने बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच बच्चों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार के कुल 1,914 मामले दर्ज किए गए।

रहमान ने कहा, ‘‘बच्चों को निशाना बनाने वालों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम उन बच्चों की बात कर रहे हैं जिनकी सुरक्षा उनके परिवारों, समुदायों और सरकार को करनी चाहिए लेकिन इसके बजाय वे हिंसा और दुर्व्यवहार के शिकार हो रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन घटनाओं से निपटने के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।’’

पाकिस्तान की संसद के उच्च सदन सीनेट की सदस्य रहमान ने कहा कि कुल मामलों में से 80 प्रतिशत मामले पंजाब प्रांत से हैं और ये बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन आंकड़ों के मद्देनजर गंभीरता से इस बात की पड़ताल करने की जरूरत है कि क्या बच्चे दुर्व्यवहार की शिकायत सुरक्षित तरीके से कर पा रहे हैं, क्या उनकी सुरक्षा के लिए बने संस्थानों के पास पर्याप्त संसाधन हैं और क्या अपराधियों को प्रभावी ढंग से न्याय के दायरे में लाया जा रहा है।’’

रहमान ने एक अन्य चिंताजनक पहलू का उल्लेख करते हुए कहा कि 43 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित थे, जबकि करीब 45 प्रतिशत घटनाएं बच्चों के अपने घरों के भीतर हुईं।

उन्होंने कहा, ‘‘घर को बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है। जब बंद दरवाजों के पीछे ही दुर्व्यवहार होता है तो हमें परिवारों और समुदायों के भीतर निगरानी, सुरक्षा उपायों और जवाबदेही को लेकर बेहद गंभीर सवाल पूछने होंगे।’’

रहमान ने जिन आंकड़ों का जिक्र किया है, उनके अनुसार 57 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्रों और 43 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए।

रहमान ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की समस्या है।

उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि अब अधिक मामले पुलिस के संज्ञान में आ रहे हैं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में तेजी से सुनवाई की जानी चाहिए।

रहमान ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की।

भाषा सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल


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