सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को भुगतने होंगे परिणाम : संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक
सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को भुगतने होंगे परिणाम : संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 27 मई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के ‘‘परिणाम’’ भुगतने होते हैं और उसने यह भी कहा कि पड़ोसी देश द्वारा प्रायोजित ऐसे आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का उसे ‘‘पूरा अधिकार’’ है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा, ‘‘मुझे आज पाकिस्तान द्वारा की गई निराधार और अनुचित टिप्पणियों का जवाब देना होगा। भारत तथ्यों को स्पष्ट करना चाहता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्र भारत ने अपने अस्तित्व की शुरुआत पाकिस्तान की सीमा पार आक्रामकता से लड़ते हुए की थी। पाकिस्तान उन भारतीय क्षेत्रों पर दावा कर रहा था, जो वैध, पूर्ण और अपरिवर्तनीय विलय के परिणामस्वरूप भारत का हिस्सा बने थे।’’
पाकिस्तान के खिलाफ पर्वतनेनी की यह कड़ी प्रतिक्रिया सुरक्षा परिषद में ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने तथा संयुक्त राष्ट्र केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित बहस के दौरान आई। मई के लिए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे चीन ने इस बैठक की मेजबानी की।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बैठक के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
सुरक्षा परिषद की बहस को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री सह विदेश मंत्री इसहाक डार ने जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया और सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी।
पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
पाकिस्तान की आलोचना करते हुए पर्वतनेनी ने कहा कि ‘‘सीमा पार आतंकवाद का पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल और ‘हजार जख्म देकर भारत को कमजोर करने’ का उसका सिद्धांत, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति उसकी प्रतिबद्धता संबंधी खोखली बयानबाजी को उजागर करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत को ऐसे सीमा पार आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के परिणाम भुगतने होते हैं।’’
भारतीय राजदूत ने कहा कि कई युद्ध छेड़कर, भारत के खिलाफ अकारण आक्रामकता दिखाकर और लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देकर पाकिस्तान ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, हिंसक चरमपंथ और भारत विरोधी बयानबाजी जैसी दुष्ट शक्तियों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपनी स्थापना के समय से लगातार करता आ रहा है। इस संबंध में तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं और उन्हें और स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तान को सभी प्रकार के आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त करना होगा।’’
भाषा गोला रंजन
रंजन

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