पाकी खुफिया एजेंसी के पूर्व डीजी का दावा- आईएसआई को भारतीय पीएम के रुप में मोदी ही पसंद

पाकी खुफिया एजेंसी के पूर्व डीजी का दावा- आईएसआई को भारतीय पीएम के रुप में मोदी ही पसंद

पाकी खुफिया एजेंसी के पूर्व डीजी का दावा- आईएसआई को भारतीय पीएम के रुप में मोदी ही पसंद
Modified Date: November 29, 2022 / 08:58 pm IST
Published Date: May 26, 2018 8:34 am IST

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व महानिदेशक असद दुर्रानी और पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत के साथ मिलकर लिखी गई किताब पर पाकिस्तान नाराज है। यह पुस्तक भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर आधारित है। इस पर आपत्ति जताते हुए पाकिस्तानी सेना ने दुर्रानी को तलब किया है।

 किताब में कश्मीर समस्या, करगिल युद्ध, ओसामा बिन लादेन का मारा जाना, कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी, हाफिज सईद, बुरहान वाणी समेत कई मुद्दों पर बात की गई है। किताब का नाम द स्पाई क्रॉनिकल्स: रॉ, आईएसआई ऐंड द इल्यूजन ऑफ पीसहै। इसे दो बड़े जासूसों और पत्रकार आदित्य सिन्हा ने मिलकर लिखा है।

इस किताब के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व डीज़ी असद दुर्रानी और भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व सेक्रटरी एएस दुलत ने कई मुद्दों को फिर से याद किया।

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किताब में दावा किया गया है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से आईएसआई खुशथा। किताब में दुर्रानी ने लिखा है कि आईएसआई की पहली पसंद मोदी ही हैं। दुर्रानी ने लिखा है कि इसके पीछे मोदी की कट्टरपंथीछवि है। आईएसआई को उम्मीद है कि मोदी कोई ऐसा कदम उठाएंगे जिससे भारत की सेक्युलर छवि को नुकसान पहुंचेगा। इससे पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर फायदा होगा।

पुस्तक में यह भी दावा किया गया है कि दुर्रानी ने 1998 में भाजपा सरकार बनने से पहले भी एक लेख लिखा था। इसमें कहा गया था कि भारत में भाजपा की सरकार बनने पर पाकिस्तान को परेशान नहीं होना चाहिए। दुर्रानी के मुताबिक वाजपेयी सरकार ने यह दिखाया कि मुस्लिम विरोधी सरकार भी पाकिस्तान के लिए उतनी बुरी नहीं है।

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किताब की इन्हीं सब बातों को देखते हुए पाकिस्तानी सेना दुर्रानी से नाराज नजर आ रही है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर ने ट्वीट पर जानकारी दी कि, ‘लेफ्टिनेंट जनरल असद दुर्रानी (रिटायर्ड) को 28 मई 2018 को पाकिस्तानी सेना के हेडक्वॉर्टर में बुलाया गया है। उनसे स्पाई क्रॉनिकलकिताब के उनके रोल के बारे में पूछा जाएगा। उनके योगदान को मिलिट्री कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन के तौर पर देखा गया है। यह कोड कार्यरत रहने के साथ-साथ रिटायर हो चुके लोगों पर भी लागू है’।

वेब डेस्क, IBC24


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